राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं- आध्यात्म शक्ति ने मुझे अंधकारमय जीवन से बाहर निकाला
Edited By Amit Kasana

कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू
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कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू
सिरोही से गणपत सिंह मांडोली की रिपोर्ट: ब्रह्माकुमारीज संस्थान के विभिन्न सेवा केन्द्रों पर जो आध्यात्म शक्ति प्राप्त होती है उसका ज्वलंत उदाहरण यह है कि एक समय मैं स्वयं अंधकारमय जीवन की ओर अग्रसर हो गई थी। मेडिटेशन और ध्यान योग के माध्यम से मैं मुख्य धारा में लौटी। यह बातें देश की राष्ट्रपति श्रीमति द्रोपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहीं। वह अबू रोड (सिरोही) स्थित ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन में आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर थीम के तहत आध्यात्मिक सशक्तिकरण से स्वर्णिम भारत का उदय सम्मेलन को हिस्सा ले रही थीं।
आगे राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व में अनेकों संस्थान कार्यरत हैं लेकिन ब्रह्माकुमारीज एक ऐसा संस्थान है जो बहनों द्वारा संचालित की जाती है। संस्थान में वरिष्ठ भाईयों द्वारा पीछे से सहयोग किया जाता है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की सफलता यह सिद्ध करती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं पुरुषों से बेहतर कार्य कर सकती हैं। उन्होंने कहा एक आध्यात्मिक संस्था के रूप में केवल ब्रह्माकुमारीज ही नहीं ऐसी कई संस्थाएं इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। आज यह संस्थान विश्व के 137 देशों में पांच हजार सेवाकेंद्रों का संचालन कर रही है। इसके संचालन में महिलाओं की अग्रणी भूमिका होती है। संस्थान महिलाओं द्वारा संचालित विश्व का सबसे बड़ा संस्थान है। ब्रह्माकुमारीज महिलाओं के सशक्तिकरण में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने देश में महिलाओं के खिलाफ हो रही घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि आज देश में बहनों और बेटियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं ऐसे में उन्हें शक्ति स्वरूप बनकर आगे आना होगा। ब्रह्माकुमारी बहनें-बेटियां लोगों के अंदर सतोगुण जागृत करने के लिए जागरूक करने का कार्य करें। ब्रह्माकुमारी बहनों लोगों में प्रेम, शांति और आत्मीयता को भरने और उनके अंदर विकारों को समाप्त करने का कार्य कर रही हैं। राजयोग से मेरा जीवन अंधकारमय से दूर हुआ।
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