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राजस्थान का 'मिनी स्विट्जरलैंड' पॉल्यूशन का बड़ा सेंटर! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, WHO मानक से 50 गुना तक ज्यादा प्रदूषण

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सफेद पहाड़ियों वाला इलाका अपनी अनोखी खूबसूरती के कारण ‘राजस्थान का मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से जाना जाता है. इसे देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं, लेकिन इस खूबसूरत सी दिखने वाली जगहों के लेकर बहुत डरा देने वाला खुलासा हुआ है. जानिए पूरी रिसर्च.

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किशनगढ़ मिनी स्विट्जरलैंड प्रदूषण पर बड़ा खुलासा. (Image:AI)

खबर की मुख्य बातें:-

  • राजस्थान के किशनगढ़ स्थित ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ में प्रदूषण का स्तर WHO के मानकों से 20 से 50 गुना और CPCB की सीमा से 4 से 12 गुना ज्यादा पाया गया.
  • अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर यह स्थान हकीकत में एशिया के सबसे बड़े मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड में से एक है, जहां सालों से मार्बल उद्योग का कचरा जमा किया जा रहा है.
  • रिसर्च में आसपास की हवा, मिट्टी और भूजल में प्रदूषण के गंभीर संकेत मिले हैं, जिससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है.

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सफेद पहाड़ियों वाला इलाका अपनी अनोखी खूबसूरती के कारण ‘राजस्थान का मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर है. यहां का नजारा बर्फ से ढकी पहाड़ियों जैसा दिखाई देता है, इसलिए हर साल हजारों पर्यटक और फोटोग्राफर यहां पहुंचते हैं. हालांकि, हाल ही में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि यह खूबसूरत जगह अब गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिसर्च के अनुसार यहां प्रदूषण का स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निर्धारित सीमा से 4 से 12 गुना ज्यादा और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अनुशंसित सीमा से लगभग 20 से 50 गुना तक ज्यादा दर्ज किया गया है.

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डंपिंग यार्ड बना टूरिस्ट प्लेस

आज जहां इस जगह को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, वह हकीकत में एशिया का सबसे बड़े मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड में से एक है. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 350 एकड़ में फैले इस क्षेत्र में सालों से 700 से ज्यादा टैंकर द्वारा लगभग 22 लाख लीटर मार्बल स्लरी डाली जाती है. इसके चलते धीरे-धीरे इस कचरे ने पहाड़ों का रूप ले लिया और, जो आगे चलकर पर्यटन के लिए मशहूर हो गया. लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालय की रिसर्च में बताया कि यह पहला अध्ययन है, जिसमें ‘डंपिंग यार्ड के 15 किलोमीटर के दायरे में सिंचित और वर्षा आधारित कृषि भूमि, भूजल और वायु गुणवत्ता का आंकलन किया गया. इसके साथ ही ‘परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी’ तकनीक से प्रदूषकों की सांद्रता (Concentration) और एक्स-रे विवर्तन (XRD) विश्लेषण के माध्यम से प्रदूषण के खनिजीय स्वरूप को स्टडी किया गया’. एएएस तकनीक के जरिए मिट्टी और पानी में मौजूद धातुओं और अन्य प्रदूषकों की मात्रा का पता लगाया जाता है.

सोशल मीडिया पर मशहूर, लेकिन स्वास्थ्य के लिए खतरा

किशनगढ़ का यह इलाका आज सोशल मीडिया, प्री-वेंडिंग फोटोशूट और वीडियो शूटिंग के लिए काफी मशहूर हो गया है. यहां जाने पर ऐसा महसूस होता है कि आप किसी दूसरे देश में आ गए हैं, जहां चारों तरफ सफेद रंग की विशाल पहाड़ियां दिखती है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार उड़ती मार्बल की महीन धूल पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है. लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से सांस संबंधी समस्याएं, एलर्जी और फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है.

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रिसर्च में क्या आया सामने?

शोध के दौरान यह भी सामने आया कि औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने और तेज हवाओं के समय प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया. अध्ययन में आसपास की मिट्टी और भूजल में भारी धातुओं के अंश भी पाए गए, जो लंबे समय में पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान यह भी पता चला कि क्षेत्र के कई निवासी सांस लेने में दिक्कत आदि समस्या से परेशान है.

मुख्य निष्कर्ष:- राजस्थान का ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ अपनी खूबसूरती के कारण लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन हालिया रिसर्च ने इसके पीछे छिपे गंभीर पर्यावरणीय खतरे को उजागर किया है. मार्बल स्लरी से बढ़ता प्रदूषण हवा, मिट्टी और भूजल को प्रभावित कर रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी असर पड़ सकता है.

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लेखक के बारे में

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.
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