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महाराष्ट्र में ST नेता क्यों कर रहे शिंदे सरकार के फैसले का विरोध, महायुति की हुई किरकिरी, समझिए पूरा केस

Maharashtra assembly Election 2024: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले एसटी विधायकों ने धनगर समाज को एसटी आरक्षण देने के फैसले का विरोध किया है। नरहरि झिरवल की अगुवाई में आधा दर्जन आदिवासी विधायकों ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय की बिल्डिंग में जबरदस्त बवाल काटा। विधायक सचिवालय की बिल्डिंग में बंधी जाली पर कूद गए।

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Maharashtra assembly Election 2024: महाराष्ट्र में धनगर समुदाय को एसटी कोटा देने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ आदिवासी विधायकों और नेताओं ने जबरदस्त विरोध किया है। महायुति सरकार में सबसे वरिष्ठ आदिवासी नेता नरहरि झिरवल के साथ आधा दर्जन आदिवासी विधायक शुक्रवार को राज्य सचिवालय की बिल्डिंग में बंधी जाली पर कूद गए। एनसीपी विधायक धनगर समुदाय को एसटी आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं। नरहरि झिरवल राज्य में डिप्टी स्पीकर के पद पर हैं। दरअसल राज्य सचिवालय में सुरक्षा के लिए जाली लगाई है, ताकि कोई बिल्डिंग से कूदकर जान न दे सके।

अजीत पवार की एनसीपी के विधायक नरहरि झिरवल बतौर डिप्टी स्पीकर एक संवैधानिक पोस्ट पर हैं, लेकिन राज्य सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए जाली पर कूद गए। राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विधायकों के इस व्यवहार की जांच होगी। लेकिन सवाल ये है कि राज्य के आदिवासी विधायक विरोध क्यों कर रहे हैं।

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2018 में आत्महत्या का प्रयास

नरहरि झिरवाल के साथ सचिवालय की तीसरी मंजिल से जाली पर कूदने वाले विधायकों में किरण लहमाते, हिरामन खोसकर और राजेश पाटिल भी थे। ये सभी विधायक शुक्रवार की दोपहर को जाली पर कूदे। हालांकि थोड़ी ही देर में पुलिस पहुंच गई। बाद में इन विधायकों के साथ सांसद हेमंत सावरा भी आ गए।

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महाराष्ट्र के राज्य सचिवालय में 2018 में आत्महत्या का एक प्रयास हुआ था, जिसके बाद सुरक्षा के लिए जाली लगाई गई थी। जाली से उतारे जाने के बाद विधायकों ने सचिवालय के कॉरिडोर में विरोध प्रदर्शन किया।

आदिवासी विधायकों के विरोध से शिंदे सरकार की किरकिरी

नरहरि झिरवाल और अन्य विधायकों के विरोध करने से एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा है। शिंदे सरकार ने धनगर समाज को एसटी के तहत आरक्षण देने का प्रस्ताव किया था। और अब उसके ही विधायक फैसले के विरोध में उतर आए हैं।

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झिरवल आदिवासी बहुल डिंडौरी सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले महीने उन्होंने सीएम शिंदे को पत्र लिखकर धनगर समाज को एसटी आरक्षण देने के फैसले को असंवैधानिक बताया था। और सरकार से इस तरह का कोई कदम न उठाने की अपील की थी।

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महाराष्ट्र में धनगर समाज के लोग मुख्य तौर पर चरवाहे या गड़रिया (शेफर्ड) का काम करते हैं। झिरवल और एसटी समाज इसी धनगर समाज को एसटी कोटे से आरक्षण देने का विरोध कर रहा है। हालांकि झिरवल का कहना है कि धनगर समाज के विकास के लिए उन्हें आर्थिक पैकेज देने के खिलाफ नहीं हैं।

बता दें कि शिंदे सरकार ने महाराष्ट्र में Dhangar को एसटी कोटे से आरक्षण देने का फैसला लिया था। लेकिन इसे लागू नहीं किया गया है। झिरवल का कहना है कि Dhangar और Dhangad एक ही हैं।

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महाराष्ट्र में Dhangar को विमुक्ति जाति और नोमेडिक ट्राइब्स (VJNT) के तहत आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन पिछले कई दशकों से Dhangar एसटी का दर्जा मांग रहे हैं। Dhangar नेताओं का कहना है कि उनका समुदाय अन्य राज्यों में Dhangad के तौर पर जाना जाता है और उसे एसटी आरक्षण मिलता है। महाराष्ट्र के अलावा धांगड़ या धनगर (Dhangad या Dhangar) गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इन्हें गोल्ला या कुरुबा जाति के तौर भी जाना जाता है।

महाराष्ट्र में आरक्षण

महाराष्ट्र में एससी को 13 प्रतिशत, एसटी को 7 प्रतिशत, ओबीसी को 19 प्रतिशत, स्पेशल बैकवर्ड क्लास को 2 प्रतिशत, विमुक्त जाति को 3 प्रतिशत, Namadic (घुमंतू) ट्राइब बी को 2.5 प्रतिशत, Namadic ट्राइब सी Dhangar को 3.5 प्रतिशत, Namadic ट्राइब डी वंजारी को 2 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसके अलावा EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण अलग से है।

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First published on: Oct 05, 2024 02:12 PM

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