महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और अब सीधा अदालत के दरवाजे तक पहुंच चुकी है. उद्धल ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा दिए गए एक बड़े फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मानसून सत्र के ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष ने उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने की हरी झंडी दे दी थी. इस फैसले से नाराज उद्धव गुट ने अदालात का दरवाजा खटखटाया है और लोगसभा अध्यक्ष के इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि इस मामले पर तत्काल सुनवाई की अनुमति दी जाए.

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कोर्ट के सामने उद्धव सेना के वकील ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) की ओर से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने इस मामले को सीजेआई सूर्यकांत के सामने तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया. सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जब उद्धव शिवसेना के वकील से इस मामले में तत्काल सुनवाई को लेकर पूछा तो उन्होंने अदालत के सामने कहा- 'एक राजनीतिक दल के तौर पर संसद में मेरा कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है. ये सांसद मेरे साथ नहीं हैं. स्पीकर ने इनका दूसरी पार्टी में विलय को मंजूरी दे दी है और यह इसी संसद सत्र के लिए है.'

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कोर्ट ने कहां- वादा नहीं कर सकते (कल या शुक्रवार की लिस्टिंग की). देखते हैं.

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लोकसभा में कमजोर पड़ रहा उद्धव गुट

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 6 बागी सांसदों के विलय को मंजूरी मिलने के बाद लोकसभा में उद्धव शिवसेना की ताकत का पलड़ा डगमगा सा गया है. दरअसल, इस फैसले से पहले लोकसभा में उद्धव शिवसेना गुट के पास कुल 9 सांसद थे, लेकिन फैसले के बाद 6 सांसदों के चले जाने से उद्धव गुट के सिर्फ 3 ही सांसद रह जाएंगे. वहीं दूसरी ओर एकनाथ शिंदे की की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है, जिसका सीधा मतलब है कि लोकसभा में NDA और ताकतवर हो जाएगी.

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शिवसेना में शामिल होने वाले लोकसभा सांसदों के नाम कुछ इस प्रकार हैं;

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  • संजय देशमुख (यवतमाल)
  • संजय जाधव (परभणी)
  • संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट)
  • नागेश पाटिल (हिंगोली)
  • ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर (धाराशिव)
  • बाबूसाहेब वाकचौरे (शिरडी)

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