महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों के वरिष्ठ नेताओं की अलग-अलग बैठकों ने राज्य के सियासी गलियारों में कयासों का दौर शुरू कर दिया है. शरद पवार ग्रुप के सीनियर लीडर जयंत पाटिल देर रात CM फडणवीस से मिलने वर्षा बंगले पहुंचे थे. जिससे पॉलिटिकल डेवलपमेंट में तेजी आने की उम्मीद है. पाटिल से पहले प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी वर्षा बंगले पर पहुंचे थे.
फडणवीस के साथ बंद कमरे में लंबी बातचीत
सूत्रों का कहना है कि तीनों नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बंद कमरे में लंबी बातचीत चली. शरद पवार ग्रुप के लीडर जयंत पाटिल और सीएम फडणवीस की मीटिंग से महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है. दूसरी तरफ सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी अलग से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे. इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए आने वाले समय में जोरदार झटका माना जा रहा है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: महिला से छेड़छाड़ का विरोध करने पर परिवार का 15 किलोमीटर तक पीछा, कार में की तोड़फोड़
---विज्ञापन---
फडणवीस से मुलाकात पर क्या बोले जयंत पाटिल?
एनसीपी शरद चंद्र पवार पार्टी के नेता जयंत पाटिल का कहना है कि वो अपनी पार्टी के काम के लिए गए थे और उनकी प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से मुलाकात नहीं हुई. वहीं, एनसीपी अजित गुट के नेता कहते हैं कि उनके नेता पहले गए थे
लेकिन सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में तीनों नेताओं की बात हुई है, इससे पहले भी जब अजित पवार जिंदा थे तो दोनों एनसीपी के विलय की बात जयंत पाटिल के साथ ही चल रही थी. इससे पहले भी खबर आई थी कि जयंत पाटिल ने विधानसभा अधिवेशन के दौरान रोहित पवार को छोड़कर बाकि विधायकों के साथ गुप्त बैठक की थी, सूत्रों के मुताबिक उस बैठक में ज्यादातर विधायक एनडीए के साथ जाने के पक्ष में थे.
---विज्ञापन---
सूत्रों की मानें तो पार्टी के दस विधायकों में से करीब आधे अब भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ जाने के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं. इसकी बड़ी वजह विपक्ष में रहते हुए अपने-अपने क्षेत्रों के लिए विकास कार्यों की मंजूरी और फंड जुटाने में आ रही लगातार दिक्कतें बताई जा रही हैं.
---विज्ञापन---
जयंत पाटिल ने दिया था संकेत
जयंत पाटिल खुद पार्टी आलाकमान को विधायकों के इस झुकाव से अवगत करा चुके हैं, हालांकि शरद पवार ने इस पूरे प्रकरण पर अब तक चुप्पी साध रखी है. संख्या के लिहाज से देखें तो शरदचंद्र पवार गुट के पास विधानसभा में दस विधायक और लोकसभा में आठ सांसद हैं. राज्य के छह प्रमुख दलों में यह भले ही सबसे छोटा दल हो, लेकिन आगामी सत्रों में सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए एनडीए को जिस अतिरिक्त संख्या बल की जरूरत है, उसमें यह दल निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: भारत-ब्रिटेन FTA आज से लागू, सस्ती होंगी लग्जरी कारें, व्हिस्की और ब्यूटी प्रोडक्ट्स