देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच मुंबई पुलिस की 1930 साइबर हेल्पलाइन ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। साल 2026 के पहले पांच महीनों में मुंबई पुलिस ने साइबर ठगी के शिकार नागरिकों के 101 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाकर हजारों लोगों को राहत पहुंचाई है। मुंबई पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच के अंतर्गत 17 मई 2022 को शुरू की गई 1930 साइबर हेल्पलाइन आज साइबर अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार बनकर उभरी है।

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ये है हेल्पलाइन नंबर जारी करने का मकसद

हेल्पलाइन का मुख्य उद्देश्य ठगी का शिकार हुए लोगों की शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई कर रकम को संबंधित बैंक खातों में होल्ड या फ्रीज कराना है, ताकि पीड़ितों की मेहनत की कमाई वापस बचाई जा सके। इस हेल्पलाइन पर शेयर ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, फर्जी जॉब ऑफर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड और फिशिंग जैसे साइबर अपराधों की शिकायतें सबसे ज्यादा दर्ज हो रही हैं। शिकायत मिलते ही हेल्पलाइन एक्टि होती है।

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एक जनवरी से अब तक ढाई लाख शिकायतें

हेल्पलाइन पर तैनात अधिकारी संबंधित बैंक, वॉलेट कंपनियों, मर्चेंट्स और पेमेंट गेटवे के नोडल अधिकारियों से तुरंत संपर्क कर रकम फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। मुंबई पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से 19 मई 2026 तक 1930 हेल्पलाइन पर कुल 2 लाख 55 हजार 92 कॉल प्राप्त हुईं। इनमें से 30 हजार 302 मामलों में ठगी गई रकम को होल्ड करने में सफलता मिली। इस दौरान कुल 101 करोड़ 39 लाख 6 हजार 556 रुपये बचाए गए।

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मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन कर रहीं मार्गदर्शन

रकम होल्ड करने की सफलता दर 25.68 प्रतिशत दर्ज की गई। अगर मई 2022 से मई 2026 तक के कुल आंकड़ों पर नजर डालें, तो 1930 साइबर हेल्पलाइन ने अब तक साइबर ठगी के मामलों में 491 करोड़ 57 लाख 80 हजार 779 रुपये फ्रीज कर नागरिकों को बड़ी राहत दिलाई है। यह पूरी मुहिम मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के मार्गदर्शन में चलाई जा रही है। मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन या आर्थिक ठगी होने पर बिना देर किए शिकायत दें।

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तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि साइबर फ्रॉड के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और समय रहते शिकायत मिलने पर रकम बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें नागरिक राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल⁠ पर भी दर्ज करा सकते हैं।