मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल के अनशन का आज 11वां दिन है. आंदोलन के बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री राधा कृष्ण विखे पाटिल ने बड़ा बयान दिया है. जिससे मराठा आरक्षण पर विवाद और भी गहरा सकता है. मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री विखे पाटिल ने कहा कि अगर जरांगे को समाधान नहीं मिल रहा है तो उनके पास इससे ज्यादा अब कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने ये भी साफ कहा कि अब सरकार का शिष्टमंडल मनोज जरांगे पाटिल से मिलने के लिए जालना के अंतरावली नहीं जाएगा. मराठा आरक्षण के मामले में सरकार ने निर्णय लिया है, अगर उससे मनोज जरांगे पाटिल संतुष्ट नहीं हो रहे हैं तो उनके पास अब कोई विकल्प नहीं है. आपको बता दें, राधा कृष्ण विखे पाटिल मराठा आरक्षण उप समिति के अध्यक्ष है.
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मनोज जरांगे की तबीयत बिगड़ी
मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल का अनशन जारी है. कल आधी रात को उनकी तबीयत और बिगड़ गई. मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड के आग्रह के बाद उन्होंने सलाइन चढ़वाया. हालांकि, उन्होंने अनशन जारी रखने और मांगें पूरी नहीं होने पर मुंबई कूच करने का निर्णय किया है. राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा- ''सरकार की ओर से जो-जो फैसले लेना जरूरी था, वो सभी फैसले हम ले चुके हैं. अगर इससे उन्हें संतुष्टि नहीं हो रही है, तो भी हम प्रयास कर रहे हैं. हम मराठा समाज के व्यापक हित के लिए प्रयास कर रहे हैं. इन फैसलों का क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है. अगर जरांगे इससे संतुष्ट नहीं हैं, तो अब मेरे पास ऐसा कोई दूसरा विकल्प नहीं है, जिससे मैं उन्हें संतुष्ट कर सकूं.''
'लोग आवेदन नहीं कर रहे हैं'
कष्ण पाटिल ने कहा- ''मनोज जरांगे की मांगें हद से बाहर नहीं हैं. उन्होंने 58 लाख रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया था. इन रिकॉर्ड्स को हमने अब ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित कर दिया है. लोगों को दिखाया गया है. 10 सितंबर से 17 सितंबर तक इसके लिए हमने शिविर आयोजित किए हैं. मंडल स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे. लोगों को आवेदन तो करना चाहिए ना. आवेदन करने के लिए हमने अपील की थी, लेकिन कितने लोगों ने इसका जवाब दिया? कुल 522 आवेदन आए हैं. इनमें से 224 आवेदन प्रमाणपत्र से जुड़े थे. इसका मतलब क्या निकाला जाए?''
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'सरकार का शिष्टमंडल कहीं नहीं जाएगा'
12 सितंबर को जरांगे पाटील ने मुंबई में धावा बोलने की चेतावनी दी है. विखे पाटिल ने कहा- ''सरकार का प्रतिनिधिमंडल कहीं नहीं जाएगा. सरकार एक कदम आगे आई है, अब जरांगे को दो कदम आगे आना चाहिए. उन्हें सरकार के प्रयासों का सकारात्मक जवाब देना चाहिए. मुझे नहीं पता कि कौन राजनीति कर रहा है. हमारा मकसद इसमें राजनीति करना नहीं है. अब समाधान क्या हो सकता है, ये सवाल जरांगे पाटिल से ही पूछा जाना चाहिए.''
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