हर कामकाजी इंसान का एक ही सपना होता है कि ऑफिस का काम खत्म कर वह जल्द से जल्द अपने घर पहुंचे और परिवार के साथ सुकून के पल बिताए. लेकिन बेंगलुरु के सिल्क बोर्ड चौराहे पर रेंगती गाड़ियां हों, या ठाणे और पुणे की सड़कों पर गाड़ियों का लंबा काफिला, यह सफर थकाभ बना देता है और मानसिक परेशानी बन जाता है. घंटों लंबे ट्रैफिक जाम में ईंधन तो जलता ही है, साथ ही हमारी सेहत और मानसिक शांति भी खत्म होती है. इसी समस्या को खत्म करते हुए सरकार ने देश के तीन बड़े आर्थिक केंद्रों और दो प्रमुख हवाई अड्डों का कायाकल्प करने के लिए ₹2 लाख करोड़ की एक महा-योजना को हरी झंडी दे दी है, जो हमारे रहने और सफर करने के अंदाज को पूरी तरह बदल देगी. इससे न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि जेब को भी आराम मिलेगा.
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आईटी हब को 'नम्मा मेट्रो फेज-3' से मिलेगी रफ्तार
बेंगलुरु की पहचान उसकी बेहतरीन तकनीकी दुनिया और उतने ही कुख्यात ट्रैफिक जाम से है. आए दिन खरब सामने आती है कि बेंगलुरु में घंटों लंबा जाम लग गया है, जिससे निकलना आसान नहीं होता, हद तो तब हो जाती है, जब बारिश के वक्त इस तरह की समस्या बनने लगती है. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने 'नम्मा मेट्रो' के तीसरे चरण (Phase 3) को मंजूरी दे दी है. लगभग ₹15,600 करोड़ के बजट वाली यह परियोजना मुख्य रूप से आउटर रिंग रोड और शहर के व्यस्त बाईपास रास्तों को आपस में जोड़ेगी. इसके तहत नए एलिवेटेड स्टेशन और मजबूत ट्रैक बनाए जा रहे हैं ताकि मुसाफिरों को बार-बार ट्रेन बदलने के लिए भटकना न पड़े. इस कॉरिडोर के बनने से न सिर्फ आईटी पेशेवरों का समय बचेगा, बल्कि सेक्टर 56, 57 और आउटर रिंग रोड के आस-पास के इलाकों में फ्लैटों की कीमतें में भी इजाफा होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तपोषण केंद्र सरकार और कर्नाटक राज्य सरकार के बीच साझा किया जाएगा, साथ ही संभावित बाहरी संस्थागत ऋण भी शामिल होंगे.
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ठाणे और पुणे के लिए भी करोड़ों फंड
मुंबई पर निर्भरता कम करते हुए ठाणे को एक आत्मनिर्भर शहर बनाने के लिए ₹12,200 करोड़ की लागत से 'इंटीग्रल रिंग मेट्रो' को मंजूरी मिली है. यह एक गोलाकार लूप होगा जो नौपाड़ा, वागले एस्टेट, हीरानंदानी एस्टेट और कोलशेत जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को आपस में जोड़ेगा, जिससे स्थानीय प्रॉपर्टी बाजार में निवेश के नए दरवाजे खुलेंगे. वहीं दूसरी ओर, पुणे में दक्षिण हिस्से के विकास के लिए ₹3,000 करोड़ की लागत से स्वारगेट से कटराज तक मेट्रो का विस्तार किया जा रहा है. ऐतिहासिक और व्यस्त शहरी इलाकों के नीचे से गुजरने वाला यह रूट पूरी तरह से भूमिगत (Underground) और एलिवेटेड होगा, जो अगले 3 से 4 सालों में बनकर तैयार हो जाएगा.
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बिहटा और बागडोगरा में बनेंगे अत्याधुनिक सिविल एन्क्लेव
सड़क परिवहन के साथ-साथ देश के हवाई संपर्क को मजबूत रखने के लिए कैबिनेट ने बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए दो बड़े फैसले हैं. इन दोनों राज्यों में लगातार बढ़ते हवाई यात्रियों के दबाव को देखते हुए नए एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मंजूरी दी गई है, जिसका विवरण नीचे दी गई टेबल में आसानी से समझा जा सकता है:
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| नागरिक एन्क्लेव (स्थान) | राज्य | स्वीकृत बजट | मुख्य लाभ और उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| बिहटा सिविल एन्क्लेव | बिहार | ₹1,413 करोड़ | पटना एयरपोर्ट पर भीड़ को कम करना और नए पैसेंजर टर्मिनल के साथ रनवे का विस्तार करना। |
| बागडोगरा सिविल एन्क्लेव | पश्चिम बंगाल | ₹1,549 करोड़ | उत्तर बंगाल में पर्यटन को बढ़ावा देना और यात्रियों के लिए बहुमंजिला आधुनिक टर्मिनल बनाना। |
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