महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार को बड़ा फेरबदल होने से उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है. काफी समय में अपने बागी सांसदों के गुट में बनाए रखने की जद्दोजहद करने वाली शिवसेना (UBT) के खेमे में सेंध कंफर्म हो गई है. उद्धव गुट के बागी सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हो गए.
'यह 2022 के विद्रोह का दूसरा चरण है' : एकनाथ शिंदे
सांसदों के पार्टी में शामिल होने के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे 'असली शिवसेना' को बचाने के आंदोलन का अगला पड़ाव बताया. उन्होंने कहा, 'आज हम इन छह कट्टर शिवसैनिक सांसदों का बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की मूल शिवसेना में स्वागत करते हैं. साल 2022 में जब हमारे साथ 40 विधायक आए थे, तब वह बालासाहेब के विचारों को जीवित रखने की एक शुरुआत थी. आज का यह घटनाक्रम उसी आंदोलन का दूसरा चरण है.'
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उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन सांसदों ने किसी व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास और जनता के हितों के लिए यह फैसला लिया है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने हमारे 2022 के फैसले को चुनाव में मंजूरी दी थी, जिसके चलते हमारी ताकत 40 विधायकों से बढ़कर अब 60 तक पहुंच चुकी है.
संजय राउत पर कसा तंज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उद्धव गुट के मुखर नेता और प्रवक्ता संजय राउत पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा. नए शामिल हुए सांसदों का जिक्र करते हुए उन्होंने चुटकी ली और कहा, 'अब हमारे पास तीन-तीन संजय आ चुके हैं और संजय राठौड़ पहले से ही हमारे साथ हैं. जब हमारे पाले में इतने 'संजय' मौजूद हैं, तो हमें किसी बाहरी संजय के बयानों पर बात करने की कोई जरूरत नहीं है.'
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