Arpit Pandey
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MP Budget 2023: मध्य प्रदेश में एक मार्च को पेश होने जा रहा बजट इस बार कई मायनों में खास होने वाला है। क्योंकि चुनावी साल में पेश हो रहे इस बजट में कई योजनाओं की घोषणा की जा सकती है। क्योंकि ज्यादा से ज्यादा लोग बजट से प्रभावित हो ऐसी कोशिश सरकार की रहेगी। यही वजह है कि इस बार राज्य का बजट 3 लाख करोड़ रुपए का होने वाला है। ऐसे में जानिए कि इस बार के बजट में क्या कुछ खास रहने वाला है।
बताया जा रहा है कि इस बार शिवराज सरकार के बजट में मध्य प्रदेश की जनता पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा, इसके अलावा न ही कोई नया सेस लगाया जाएगा। हालांकि ऐसा बजट आने के बाद ही समझा जा सकता है। लेकिन शिवराज सरकार चुनावी साल में ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी इसकी उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा बजट में कुछ ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं, जिसका फायदा गरीब तबके और मिडिल क्लास वर्ग को मिले, जबकि ग्रामीण अर्धव्यवस्था पर भी सरकार का फोकस होगा। सरकार बजट में कुछ ऐसे प्रावधान भी कर सकती है, जिसका फायदा लगभग हर वर्ग को हो। यानि इस बार का बजट ऐसा होगा जिससे लगभग हर वर्ग को खुश किया जा सके।
चुनावी साल में अगर सबसे ज्यादा फोकस किसी वर्ग पर किया जाता है तो वह किसान होता है। क्योंकि मध्य प्रदेश की अर्धव्यवस्था कृषि प्रधान है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार के बजट में किसानों के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा की जा सकती है। प्रदेश में एक करोड़ 07 लाख किसान हैं, जिनमें से 67 प्रतिशत के पास दो हेक्टेयर से भी कम जमीन है। ऐसे में सरकार का फोकस छोटे और लघु किसानों पर होगा। क्योंकि जानकारों का भी मानना है कि कृषि और किसानों पर इस बजट में खासा फोकस होगा, फसल बीमा का लाभ किसानों को दिलाने के लिए बजट में राशि का प्रावधान हो सकता है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार मुआवजा राशि बढ़ाने का प्रावधान कर सकती है। जबकि फसल बीमा की राशि में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
बताया जा रहा है कि इस बार के बजट में एग्रीकल्चर, यूथ, चाइल्ड, इन्फ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, हेल्थ, सोशल वेलफेयर के साथ-साथ इस बार एससी-एसटी के लिए भी अलग बजट का प्रावधान किया जाएगा। जबकि महिलाओं, लड़कियों और युवाओं पर भी सरकार का खास फोकस होगा। बजट से पहले शिवराज सरकार की चुनावी साल में शुरू की गई लाडली बहना योजना इस बात का फोकस है।
बजट में ‘लाड़ली बहना योजना’ के बजट का भी प्रावधान किया जाएगा। क्योंकि इस योजना पर हर साल 60 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। क्योंकि प्रदेश की सभी लड़कियों को हर महीने 1 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया है। यानि हर लड़की को साल में 12 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस योजना का लाभ प्रदेश की 1.38 करोड़ लड़कियों को मिलने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा इस बार बजट में स्वास्थ्य को लेकर भी खास फोकस किया जा रहा है। पिछले साल के बजट में स्वास्थ्य पर 2 हजार करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया था। लेकिन इस बार 13 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान करने की बात कही जा रही है। यानि अस्पतालों से लेकर दवाओं तक के बजट में इस बार बड़ी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि शिवराज सरकार ने प्रदेश में कई अस्पतालें और स्वास्थ्य केंद्र खोलने की घोषणा की है। जबकि स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भर्तियां भी की जानी हैं।
एक तरफ जहां सरकार किसानों, युवाओं, महिलाओं और हर वर्ग को लुभाने की कोशिश करेगी। वहीं दूसरी तरफ शिवराज सरकार राज्य की आमदनी बढ़ाने पर भी फोकस कर सकती है। जानकारों का मानना है कि इस बार सरकार वैट न तो घटाएगी और न बढ़ाएगी। यानि जो वैट पहले से लग रहा है उसे ही यथावथ रखेगी। जिससे शिवराज सरकार प्रदेश सरकार की आय में 7 हजार करोड़ रुपए की आमदनी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। यानि सरकार खपत बढ़ाकर ही अपनी कमाई बढ़ाएगी।
जानकारों का मानना है कि वित्त विभाग ने इस बार का बजट पूरी तरह से चुनावी बजट बनाया है। यानि इस बार जनता को सीधे तौर पर कोई बोझ नहीं दिया जाएगा, लेकिन वसूली भी जनता की जेब से ही होगी। क्योंकि सरकार ने 7 हजार करोड़ बढ़ोत्तरी का लक्ष्य किया हैा। जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा पेट्रोल-डीजल से होगा। फिलहाल राज्य सरकार को पेट्रोल-डीजल से 900 करोड़ रुपए और एसजीएसटी से 4 हजार करोड़ रुपए मिल सकते हैं। लेकिन इस साल सरकार ने टैक्स कलेक्शन और अन्य संसाधनों से 86 हजार 478 करोड़ रुपए की कमाई का लक्ष्य बनाया है। यानि सरकार टैक्स कलेक्शन से ही अपना पैसा बढ़ाएगी।
सवाल यह भी बड़ा है कि एक तरफ शिवराज सरकार प्रदेश में लोकलुभावन बजट पेश करने की तैयारी में है। लेकिन दूसरी तरफ मध्य प्रदेश पर कर्ज भी बढ़ता जा रहा है। फिलहाल मध्य प्रदेश पर ढाई लाख करोड़ रपए से ज्यादा कर्ज है। प्रदेश को राजस्व के रूप में जो राशि प्राप्त होती है उसका लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा वेतन-भत्ते, पेंशन और ब्याज की अदायगी पर खर्च होता है. वेतन, पेंशन और भत्ते पर सालभर में 60 हजार करोड़ रुपये के आसपास खर्च होते हैं, ऐसे में सरकार को प्रदेश की आमदनी बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि अगर प्रदेश में लोगों की आय बढ़ी हैं तो प्रदेश सरकार बोझ भी बढ़ा है। ऐसे में कल वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा बजट से क्या कुछ खास निकालते हैं यह देखना दिलचस्प होगा।
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