मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा में भाजपा नेता के पुत्र और इलेक्ट्रानिक कारोबारी 53 वर्षीय आशीष ताम्रकार को 8 सालों तक डिजिटल अरेस्ट रखने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोपित सीबीआई अधिकारी, जज, हाईकोर्ट वकील और पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट रखते थे। इस मामले में आरोपी पीड़ित को धमकाकर 45 लाख रुपये भी अलग-अलग खातों में जमा करा लिए गए। इस मामले की शिकायत होने के बाद जांच की गई। जिसके बाद जांच होने पर मामले का पर्दाफाश हुआ। अनूपपुर पुलिस ने विदिशा जिले से एक आरोपित सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया है। दो अन्य आरोपी पहले ही मौत हो चुकी है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर 4 दिन की रिमांड पर लिया गया है।
2017 में पहली बार 23 लाख रुपये ऐंठे
थाना प्रभारी के अनुसार, कोतमानगर के भाजपा नेता अवधेश ताम्रकार के पुत्र 53 वर्षीय आशीष ताम्रकार की बाजार में इलेक्ट्रानिक दुकान है। वह बाजार में भी पैसा निवेश करते थे। 23 लाख रुपए उन्हें 2017 में मिले थे। इसकी भनक गैंग को जब लग गई। तो उन्होंने सबसे पहले नीमच थाने का अधिकारी बनकर फोन किया और 23 लाख रुपये को हवाला की रकम बताकर अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर डिजिटल अरेस्ट किया गया। आरोपियों ने कुल 45 लाख रुपये अलग-अलग खातों में डलवाते रहे। इस दौरान बदमाश स्क्रीन पर फर्जी पुलिस, जज, सीबीआई अधिकारी बनने का नाटक कर पुलिस का सायरन भी बजाते रहे। डरा सहमा व्यापारी गिरफ्तारी के डर से बदमाशों को पैसे देता रहा।
अन्य 3 की तलाश जारी
पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर आरोपी को विदिशा से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल समेत ठगी के दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इस मामले में शामिल मुख्य सरगना 26 वर्षीय महेंद्र शर्मा और उसके साथी की मौत हो चुकी है। आरोपी सहित अन्य की तलाश की जा रही है।
पुलिस का क्या कहना है
पुलिस अधीक्षक मोतिउरहान रहमान ने बताया कि आरोपियों ने युवक से साइबर ठगी के जरिए 8 साल में 45 लाख रुपये विभिन्न खातों में जमा कराए हैं। गैंग साइबर ठगी करने को लेकर भोपाल में आरबी ट्रेडर्स, तिरुपति फिनटेक सहित अन्य नाम की फर्जी कंपनियों को दिखावे के लिए खोलकर रखते थे। इनका पूरा सेटअप बनाकर चोरी छिपे साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का काम किया जाता था। ये लोग अलग-अलग नंबरों और खातों का इस्तेमाल करते थे।