डिजिटल वॉलेट स्कैम में फंसे 15 लाख लोग, ऐसे फूटा 1200 करोड़ के महाघोटाले का भांडा

गुजरात के SD Pay ऐप ने डिजिटल वॉलेट के नाम पर 15 लाख लोगों से 1200 करोड़ रुपये के बड़े पोंजी स्कैम का पर्दाफाश हुआ है, जहां बिना किसी प्रॉडक्ट या सर्विस के 7 डमी कंपनियां बनाकर लोगों से करोड़ों की ठगी की गई. अब ऐप बंद होने से पीड़ित अपना मूलधन तक नहीं निकाल पा रहे हैं. पुलिस अब अपराधियों और शिकार बने पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है.

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गुजरात के SD Pay ऐप ने डिजिटल वॉलेट के नाम पर 15 लाख लोगों से 1200 करोड़ रुपये के बड़े पोंजी स्कैम का पर्दाफाश हुआ है. CREDIT - : PTI

गुजरात के एक स्टार्टअप के डिजिटल वॉलेट ऐप ‘SD Pay’ ने देश में एक बड़े मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) घोटाले का रूप ले लिया है. भारी रिटर्न का लालच देकर अलग-अलग राज्यों के करीब 15 लाख लोगों को इस जाल में फंसाया गया, जिससे 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हो चुकी है. वडोदरा की 48 साल की एक सिंगल मदर टीचर की कहानी इस दर्दनाक सच को बयां करती है. 2025 में उन्होंने अपना 1BHK फ्लैट बेचकर मिले 9.5 लाख रुपये SD Pay में लगा दिए. नेटवर्क चलाने वालों ने भरोसा जीतने के लिए उन्हें एस्क्रो वॉलेट के दस्तावेज और एक साइन किया हुआ ब्लैंक चेक तक थमा दिया था. 2026 के बीच तक उनके वॉलेट का बैलेंस बढ़कर 50 लाख रुपये तो दिख रहा था, लेकिन वह एक रुपया भी नहीं निकाल पाईं, क्योंकि ऐप अचानक पूरी तरह बंद हो गया.

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लोन लेकर डूबा दी गृहस्थी

ठगी की मार सुरेंद्रनगर के एक शख्स पर भी पड़ी. उसने नया घर बनाने की चाह में खुद के नाम पर 20 लाख, पत्नी के नाम पर 20 लाख का पर्सनल लोन और 20 लाख रुपये का गोल्ड लोन लेकर पूरी रकम SD Pay में लगा दी. आज वह अपना मूलधन वापस पाने के लिए भी दर-दर भटक रहा है.

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ऐसे बुना गया ठगी का जाल

मुख्य आरोपी धवल पटेल ने 2024 में इस ऐप को बिल पेमेंट और मोबाइल रिचार्ज आसान बनाने के वादे के साथ लॉन्च किया था. बाद में इसे रोजाना 0.15 से 0.30 फीसदी ब्याज देने वाली स्कीम में बदल दिया गया. आरोपियों ने खुद को ‘स्वदेशी बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप’ बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों की भावनाएं भुनाईं. पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी का अपना कोई वास्तविक कारोबार या रेवेन्यू नहीं था. यह पूरी तरह पोंजी मॉडल था, जहां नए जुड़े लोगों के पैसों से पुराने लोगों को रिटर्न दिया जाता था. सितंबर 2026 में अमरेली जिले में मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. अब तक 18 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और एक दर्जन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है.

नॉर्थ गुजरात से गांधीनगर तक ऐसे फैला नेटवर्क

नॉर्थ गुजरात में पैर पसारने के बाद करोड़ों के पोंजी घोटाले के मुख्य आरोपी धवल पटेल ने गांधीनगर का रुख किया था. वहां उसने एक दुकान खोली, जहां उसकी मुलाकात मार्केटर नरेंद्रसिंह झाला से हुई. दोनों ने मिलकर लोगों को फंसाने के लिए बड़े पैमाने पर मार्केटिंग का नेटवर्क खड़ा किया. पुलिस के मुताबिक, पूरे खेल का मकसद SD Pay एप्लिकेशन के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना और उन्हें भारी मुनाफे का झांसा देकर निवेश के लिए राजी करना था.

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कागजों पर 7 कंपनियां, जमीन पर कोई काम नहीं

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने कुल सात कंपनियां रजिस्टर्ड कराई थीं. हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी भी कंपनी ने न तो कोई उत्पादन किया और न ही कोई वास्तविक सेवा दी. यह पूरी तरह से एक पोंजी स्कीम थी, जिसमें नए निवेशकों से आने वाले पैसों का इस्तेमाल पहले से जुड़े लोगों को भुगतान करने के लिए किया जाता था. सेमिनार, जूम कॉल और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए लोगों का भरोसा जीता गया और उनकी जिंदगी भर की बचत हड़प ली गई.

‘रेफरल कैशबैक’ का खतरनाक जाल

शुरुआत में भारी कैशबैक देने के बावजूद जब ऐप को मनमुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला, तो आरोपियों ने ‘रेफरल कैशबैक’ का दांव चला. इसके तहत लेवल-1 पर 30 फीसदी तक और नीचे लेवल 10 से 15 तक के लोगों को 3 फीसदी तक कमीशन का वादा किया गया. इस भारी कमीशन के लालच में कई शुरुआती निवेशकों ने इसे फुल-टाइम काम बना लिया और आगे नए लोगों को जोड़ने लगे. इसका सबसे बड़ा उदाहरण सूरत का एक शख्स है, जिसने शुरुआत में महज 1,000 रुपये लगाए, 1 करोड़ रुपये कमाए और अपने नीचे 1.6 लाख निवेशकों की एक विशाल चेन खड़ी कर दी.

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किसान से लेकर पूर्व IAS तक बने शिकार

तीन महीने की लंबी जांच के बाद भी पुलिस के सामने असली गुनहगारों और शिकार बने लोगों को अलग-अलग पहचानने की चुनौती बनी हुई है. ठगी के इस विशाल चक्रव्यूह में आम किसान, स्कूल टीचर और बैंक कर्मचारियों से लेकर पूर्व IAS अधिकारी तक अपनी मेहनत की पूंजी गंवा चुके हैं. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

रोज 25 हजार की कमाई और 800 लोगों का जाल

वडोदरा की पीड़ित टीचर ने बताया कि शुरुआत में मुनाफे से खुश होकर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी. उनकी 70 साल की बुजुर्ग मां, विधवा बहन और भाई समेत परिवार के 11 लोगों ने 30 लाख रुपये और 20 सहकर्मियों ने 12 लाख रुपये लगा दिए. टीचर के रेफरल से आगे चलकर 800 लोग जुड़ गए. एक समय पर उन्हें रोज 25 हजार रुपये ब्याज और कैशबैक मिल रहा था. कमाई बढ़ाने के चक्कर में कई लोगों ने परिजनों के नाम पर भी खाते खोल लिए थे.

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फर्जी शेयर का दबाव और धमकी

मार्च 2026 में जब नए निवेशकों से पैसा आना बंद हो गया तो रोजाना मिलने वाला ब्याज भी रुक गया. इसके बाद आरोपियों ने नया पैंतरा चला. पीड़ितों से कहा गया कि कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली है, इसलिए पैसों के बदले शेयर ले लो. टीचर के मुताबिक, उनसे साफ कहा गया कि या तो 40 लाख रुपये के शेयर लो या एक रुपया भी नहीं मिलेगा. 15 लाख से ज्यादा निवेश वाले सभी लोगों पर शेयर लेने का दबाव बनाया गया.

अमरेली के एसपी संजय खरात के अनुसार, राजकोट से पकड़े गए आरोपी संतोष पाठक ने अकेले 1 लाख निवेशक जोड़े थे. उसके खाते में 16 करोड़ रुपये थे और उसने 20 रुपये के भाव पर 2 लाख फर्जी शेयर बांटे थे, यह दावा करते हुए कि लिस्टिंग पर कीमत 100 रुपये हो जाएगी.

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ऐसे फूटा 1200 करोड़ के महाघोटाले का भांडा

6 जून 2026 को सावरकुंडला के एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने 2 लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत दर्ज कराई. आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से पैसे तो लौटा दिए और शिकायत वापस हो गई, लेकिन अमरेली पुलिस को शक हो गया. जांच में सामने आया कि निवेश अंगड़िया (कूरियर) के जरिए कैश में लिया गया था, जबकि रिफंड ‘शिव धरती कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के यस बैंक खाते से भेजा गया. इसके बाद जब साइबर पोर्टल और सीआईडी के पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए, तो इस संगठित मल्टी-लेवल पोंजी सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो गया.

पुलिसवाले की पत्नी से 10 लाख की ठगी के बाद खुला खेल

गुजरात के डिजिटल वॉलेट ऐप ‘SD Pay’ घोटाले की पहली आधिकारिक पीड़िता पुलिस को अपने ही विभाग से मिली. अमरेली में एक पुलिसकर्मी की पत्नी से 10 लाख रुपये की ठगी होने के बाद 2 सितंबर 2026 को साइबर क्राइम थाने में पहली एफआईआर दर्ज हुई. इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाते हुए ओडिशा के संबलपुर भाग रहे मुख्य प्रमोटर धवल पटेल और हिरेन शाह को गिरफ्तार कर लिया.

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1211 करोड़ का सफेद धन और कैश का बड़ा खेल

एसआईटी (SIT) की जांच में खुलासा हुआ है कि 15 लाख से अधिक यूज़र्स में से 6.52 लाख से ज्यादा बैंक खातों के जरिए 1211 करोड़ रुपये का सिर्फ ‘सफेद धन’ निवेश कराया गया था. इसके अलावा 95 से अधिक मुख्य एजेंट्स ने गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों में भारी मात्रा में नकद (काला धन) वसूला, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा गया. अब तक 6 कंपनियों के 38 और डायरेक्टर्स के 72 खातों की पहचान हुई है. 31 अक्टूबर तक 876 पीड़ितों ने 37.42 करोड़ रुपये के नुकसान की शिकायत दर्ज कराई है. फिलहाल पुलिस महज 1.86 करोड़ रुपये ही जब्त कर पाई है और आरोपियों की अचल संपत्तियों की तलाश जारी है.

पुलिस वैन में आरोपी को जड़ा थप्पड़

अमरेली पुलिस स्टेशन के बाहर उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब आरोपी धवल पटेल, भावेश धनेचा और हिरेन शाह को कोर्ट ले जाया जा रहा था. वडोदरा की पीड़ित टीचर ने पुलिस की गाड़ी रुकवाकर अंदर बैठे मुख्य आरोपी धवल पटेल को थप्पड़ जड़ दिया. पीड़िता ने रोते हुए कहा कि उसने डिप्रेशन में जान देने तक की सोची थी, लेकिन बूढ़ी मां और बेटे की खातिर उसने कानूनी लड़ाई लड़ने की ठानी.

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चार राज्यों में 18 एफआईआर

इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कुल 18 एफआईआर दर्ज हैं. साबरकांठा और दाहोद में भी दर्जनों पीड़ितों के लाखों रुपये फंसे हैं. अदालत ने सात आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जबकि दो मुख्य आरोपी नरेंद्रसिंह झाला और मुकेश लोधी अब भी फरार हैं.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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