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गुजरात

Gujarat: करोड़ों का बजट, फिर भी 5 साल में कुपोषण से 18231 नवजात शिशुओं की मौत

गुजरात में करोड़ों के बजट के बाद भी पिछले 5 साल में कुपोषण से 18,231 नवजात शिशुओं की मौत हुई है। CAG की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

Author Edited By : Pooja Mishra Updated: Apr 1, 2025 15:13

भूपेंद्र सिंह ठाकुर, अहमदाबाद

गुजरात में पिछले 5 साल में 18,231 नवजात शिशुओं की कुपोषण से मौत हुई है। इस बात का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में हुआ है। गुजरात को कुपोषण मुक्त बनाने का दावा करने वाली सरकार पर CAG की रिपोर्ट कई सवाल खड़े कर रही है। कुपोषण पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद शिशुओं की मृत्यु दर में कोई सुधार नहीं हुआ।

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गुजरात सरकार की असफलता

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 सालों में जन्म के 24 घंटे के भीतर 18,231 नवजात शिशुओं की मौत हो गई है। इसके अलावा, 83,538 नवजात शिशु एक साल भी जीवित नहीं रह पाए। इसका मतलब है कि गुजरात सरकार कुपोषण को नियंत्रित करने में लगातार असफल रही है। इसके अलावा, गुजरात में गर्भवती महिलाओं के पोषण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी, कम वजन वाले कुपोषित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

कुपोषण पर 509 करोड़ रुपये खर्च

गुजरात में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर भी बढ़ रही है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। गुजरात सरकार ने कुपोषण पर 509 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, फिर भी राज्य में 5.40 लाख बच्चे कुपोषित हैं। CAG रिपोर्ट के मुताबिक, पर्याप्त आहार और विटामिन की उपलब्धता के बावजूद कुपोषण की दर में कमी नहीं आई है। लाखों-करोड़ों रुपये का बजट आवंटित होने के बावजूद कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में गुजरात बाकी राज्यों की तुलना में काफी पीछे है।

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5 साल में 18,231 शिशुओं की मौत

CAG रिपोर्ट से पता चलता है कि 2017-18 से 2022-23 तक जन्म के 24 घंटे के भीतर मरने वाले नवजात शिशुओं की संख्या 18,231 रही है। इसका मतलब है कि हर साल औसतन 3,000 शिशु अस्पताल में दम तोड़ रहे हैं। इन 5 सालों में 83,538 नवजात शिशु एक साल भी जीवित नहीं रह सके, जबकि उन्हें इलाज मिल रहा था।

नवजात शिशुओं का मृत्यु दर

इन 5 सालों में राज्य के अंदर 8,12,886 नवजात शिशुओं का जन्म हुआ। इन बच्चों का वजन 2.5 किलोग्राम से भी कम था। कुपोषित माताओं को पोषक आहार न मिलने के कारण कमजोर शिशु जन्म ले रहे हैं। राष्ट्रीय पोषण मिशन (2017) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कम वजन वाले शिशुओं की मृत्यु दर को कम नहीं किया जा सका है। वर्तमान में गुजरात में 2.5 किलोग्राम से कम वजन वाले नवजात शिशुओं का प्रतिशत 11.63% है। इससे यह स्पष्ट है कि नवजात शिशु मृत्यु दर खतरनाक स्तर तक बढ़ रही है और कुपोषण मुक्त गुजरात के दावों की सच्चाई उजागर हो गई है।

7 जिलों में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं

गंभीर कुपोषण से ग्रस्त नवजात शिशुओं को विशेष इलाज देने के लिए न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर्स (पोषण पुनर्वास केंद्र) स्थापित किए जाने थे। लेकिन CAG की रिपोर्ट के अनुसार, अरावली, बोटाद, द्वारका, गिर सोमनाथ, महीसागर, मोरबी और पोरबंदर में ऐसे कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं बनाए गए। जबकि नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए इन केंद्रों की जरूरत थी।

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8.82 लाख शिशुओं की पहचान

गंभीर कुपोषण से पीड़ित 8.82 लाख नवजात शिशुओं की पहचान की गई, लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारियों को घर-घर जाकर इन शिशुओं की जांच करनी थी, जिसमें से मात्र 94,000 की ही जांच की गई। इसके अलावा, 1.63 लाख शिशुओं को कुपोषण उपचार केंद्रों में भेजा गया। इससे साफ होता है कि शिशुओं के स्वास्थ्य की जांच में घोर लापरवाही बरती गई।

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Edited By

Pooja Mishra

First published on: Apr 01, 2025 03:06 PM

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