Delhi High Court Women Crime: एक मामले में निचली अदालत द्वारा महिला आरोपियों को बरी करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद अहम टिप्पणी की है और कहा है कि महिलाएं अपराध नहीं कर सकती हैं, यह सोच ही गलत है। इसके साथ ही अपराध की गंभीरता और संलिप्तता को ध्यान में रखकर ही कार्रवाई होनी चाहिए। यह भी कहा है कि कानून सबके लिए समान है और भारतीय न्याय प्रणाली इसी सिद्धांत पर काम करती है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह सोच गलत है कि महिला अपराध नहीं कर सकती है। इसके साथ यह भी कहा कि भारतीय न्याय/कानून प्रणाली समान सिद्धांत पर आधारित है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को कानून की कसौटी पर ही दोषी ठहराया जा सकता है।
पीठ ने अपनी अहम टिप्पणी में यह भी कहा कि निचली अदालत ने महिला आरोपितों को 'महिला अपराध नहीं कर सकती' की अवधारणा के आधार पर बरी करके बेहद गंभीर चूक की है। यह कानून के लिहाज से ठीक नहीं है और आरोप तय करने के चरण में कतई स्वीकार्य नहीं है।
यह भी कहा कि बिना किसी वैध अथवा ठोस के आधार पर आरोपी महिला के पक्ष में बनाई गईं धारणाएं हमारी न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांते के विरुद्ध है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी दिल्ली हाई कोर्ट ने उस मामले की, जिसमें चार महिलाओं को बरी कर दिया गया।
5 पुरुषों के खिलाफ आरोप तय करते हुए दिल्ली की एक निचली अदालत द्वारा चार महिला आरोपियों को इस आधार पर बरी कर दिया था। फैसले में कहा गया था कि इस बात का कोई सबूत नहीं हैं कि महिलाएं भी शामिल थीं। जांच के दौरान सामने आया था कि महिलाओं ने पुरुषों को अपराध के लिए उकसाया था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी।