दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के दौरान मारपीट के मामले में घिरे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. आरोपी ने राहत की उम्मीद में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां सुनवाई होने से पहले ही निचली अदालत से उसे यह बड़ा झटका लग गया. अडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया.
पुलिस ने सुरक्षा और अन्य कारणों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जज के सामने पेश किया था, जहां से अदालत ने उसे सीधे जेल भेजने के निर्देश दिए.
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हाई कोर्ट में लगाई थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
एक तरफ जहां अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजा, वहीं दूसरी तरफ स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी लगाई है. भारद्वाज ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध घोषित करने की मांग की है. हालांकि, इस याचिका पर सुनवाई हो पाती, उससे पहले ही निचली अदालत का फैसला आ गया.
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बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि प्रदर्शन के दौरान एक दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट करने का आरोप स्वतंत्र भारद्वाज पर लगा था. इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था. अब न्यायिक हिरासत मिलने के बाद आरोपी को 14 दिन जेल की सलाखों के पीछे काटने होंगे.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था. आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल 38 वर्षीय संजय कुमार के साथ स्वतंत्र भारद्वाज और उसके साथियों ने मारपीट की, जिसमें संजय के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें टांके लगाने पड़े. संजय उस समय अपनी नाबालिग बेटी के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे. शुरुआत में पुलिस ने साधारण मारपीट और रास्ता रोकने की धाराओं में मामला दर्ज कर स्वतंत्र को नोटिस देकर छोड़ दिया था.
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पॉडकास्ट के वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
मामले ने तब तूल पकड़ा जब हाल ही में एक यूट्यूब पॉडकास्ट का वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर यह डींगें हांकते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शनकारी के पिता का सिर फोड़ दिया था और अपने राजनीतिक संपर्कों की वजह से वे जेल जाने से बच गए. वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और भीम आर्मी के प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संसद मार्ग थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठाई.
पोक्सो और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगीं
विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने दर्ज मुकदमे में एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट और आपराधिक धमकी की धाराएं जोड़ दीं. इसके अलावा पीड़ित की नाबालिग बेटी को सोशल मीडिया पर मिली धमकियों और अभद्र टिप्पणियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत भी अलग से मामला दर्ज किया है.
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उधर, स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा बड़े नेताओं के नाम लिए जाने पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी उनसे दूरी बनाते हुए दिल्ली पुलिस में नाम के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई है. फिलहाल दिल्ली पुलिस आरोपी से पूछताछ कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है.
कौन है स्वतंत्र भारद्वाज? निशु आजाद के पिता का सिर फोड़ने का दावा करने पर हिरासत में
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