दिल्ली और फरीदाबाद के बीच रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. आश्रम चौक से सराय ख्वाजा (सेक्टर-37) तक एक नया 6-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 600 से 800 करोड़ रुपये बताई जा रही है. माना जा रहा है कि इसके बनने के बाद यह पूरा रूट सिग्नल-फ्री हो जाएगा और यात्रा का समय घटकर लगभग 10 से 15 मिनट रह जाएगा. यह प्रोजेक्ट NCR के सबसे व्यस्त रूट पर ट्रैफिक कम करने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट के बारे में.

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कहां-कहां से गुजरेगा नया कॉरिडोर

यह नया एलीवेटेड हाईवे दिल्ली-एनसीआर (NCR) के उन चुनिंदा इलाकों को पूरी तरह बायपास कर देगा, जो अपनी बदतर ट्रैफिक व्यवस्था और लंबे जाम के लिए बदनाम हैं. इनमें बदरपुर बॉर्डर और अली गांव (अली विलेज), न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, ओखला, CRRI और सरिता विहार जैसे मुख्य डार्क-स्पॉट्स शामिल हैं, जहां सुबह और शाम के समय वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं. यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन बड़े ट्रैफिक पॉइंट्स के ऊपर से गुजरेगा, जिससे स्थानीय वाहनों और लंबी दूरी के पैसेंजर्स का रूट पूरी तरह अलग हो जाएगा.

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इस योजना से न सिर्फ छोटे वाहनों बल्कि व्यापारिक ट्रकों और भारी मालवाहकों को भी एक सुगम रास्ता मिलेगा, जिससे दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर गाड़ियों का दबाव काफी हद तक घट जाएगा. इसके पूरा होते ही दिल्ली से फरीदाबाद बॉर्डर पार करने में लगने वाला घंटों का समय घटकर मात्र 10 से 15 मिनट रह जाएगा, जिससे लोगों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा

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इस बड़े प्रोजेक्ट से जनता को मिलेंगे ये शानदार फायदे

  • एक्सप्रेसवे का बैकअप: इस मुख्य एलिवेटेड प्रोजेक्ट के साथ-साथ अधिकारी डीएनडी-केएमपी (DND-KMP) एक्सप्रेसवे के निर्माण पर भी पूरी ताकत से काम कर रहे हैं, जिसका लगभग 93 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है.
  • वैकल्पिक सुगम मार्ग: डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे का बचा हुआ काम पूरा होते ही फरीदाबाद, दिल्ली और पलवल के बीच आने-जाने वाले लोगों को एक नया, चौड़ा और बेहद तेज गति वाला वैकल्पिक हाईवे मिल जाएगा.
  • नेशनल हाईवे पर घटेगा लोड: इन दोनों बड़ी सड़क परियोजनाओं के आपस में सिंक होने के बाद, दिल्ली-आगरा मुख्य राजमार्ग (NH-19) पर चलने वाली गाड़ियों का ट्रैफिक लोड बहुत कम हो जाएगा.
  • समय और ईंधन की भारी बचत: सिग्नलों के पूरी तरह समाप्त होने से गाड़ियों को बार-बार रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी और कम्यूटर्स के कीमती समय के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की भी बड़ी बचत होगी.

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