जल जीवन मिशन से जुड़े कथित 960 करोड़ रुपए के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. ACB के डीजी गोविंद गुप्ता ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है.

ACB के अनुसार, इस मामले में पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि 4 आरोपी फरार चल रहे थे. इनमें से सुबोध अग्रवाल को अब दिल्ली के एक पब्लिक प्लेस से सुबह करीब 11:30 बजे गिरफ्तार किया गया.

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फर्जी सर्टिफिकेट से हुआ खेल

जांच में सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ फर्मों ने फर्जी सर्टिफिकेट लगाए थे. हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद न तो टेंडर रोका गया और न ही समय रहते कार्रवाई की गई. उल्टा निरीक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया.
ACB का कहना है कि अगर समय पर सख्त कदम उठाए जाते, तो करीब 960 करोड़ रुपए का यह घोटाला नहीं होता.

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निरीक्षण प्रक्रिया पर उठे सवाल

50 करोड़ रुपए से अधिक के टेंडर में मौके पर निरीक्षण अनिवार्य था, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और गोपनीय बनी रहे. लेकिन जांच में सामने आया कि निरीक्षण की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं हुईं, जिससे संदेह और गहरा गया.

फरार आरोपियों पर शिकंजा

मामले में 3 अन्य आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं. फिलहाल संजीव गुप्ता, मुकेश और जितेंद्र फरार बताए जा रहे हैं.
ACB ने बताया कि 17 फरवरी से लगातार गिरफ्तारी अभियान चलाया जा रहा है. फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों—रिश्तेदारों और संपर्कों—पर कई बार टीमें भेजी गईं. कुछ बार सुराग भी मिले, लेकिन आरोपी हर बार बच निकलने में सफल रहे.

अन्य आरोपियों को कोर्ट से राहत

इस मामले में 5 अन्य आरोपियों को फिलहाल कोर्ट से राहत मिली हुई है, जिससे जांच एजेंसी की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है.
ACB का कहना है कि बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

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