दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजे शनिवार को घोषित कर दिए गए. इलेक्शन का रिजल्ट आने के बाद एबीवीपी खेमे में खुशी की लहर तोड़ पड़ी, क्योंकि पार्टी ने तीन अहम पदों पर बंपर जीत की. डूसू के प्रेसिडेंट पद पर एबीवीपी उम्मीदवार यश डबास ने भारी मतों से जीत हासिल की, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद पर रिया छावड़ी और लक्ष्य राज सिंह ने परचम लहराया. डूसू चुनाव के बाद अब कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रेसिडेंट बनने के बाद यश डबास को सैलरी भी मिलेगी और उनकी पावर क्या होगी?
DUSU अध्यक्ष को कितनी मिलती है सैलरी?
सबसे पहले आपको ये बता दें कि DUSU अध्यक्ष का पद किसी नियमित सरकारी या विश्वविद्यालय की नौकरी की तरह नहीं है और ना ही यूनिवर्सिटी में किसी सांसद या विधायक जैसा पद होता है. सैलरी को लेकर हमें ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि नए प्रेसिडेंट यश डबास को कितनी सैलरी मिलेगी. हालांकि कई मीडियो रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि डूयू के प्रेसिडेंट को कोई हर महीने कोई फिक्स सैलरी नहीं मिलती. लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से किसी तरह की सुविधा या खर्च की व्यवस्था होती है तो वह संबंधित प्रशासनिक प्रावधानों पर निर्भर करती है.
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क्या होती है अध्यक्ष की असली पावर?
DUSU संविधान के मुताबिक अध्यक्ष छात्र संघ का प्रमुख होता है. छात्र संघ के कामकाज को लीड करना और संविधान के दायरे में छात्र संघ से जुड़े मामलों को संचालित करना एक प्रेसिडेंट की प्रमुख जिम्मेदारी होती है. अध्यक्ष विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाने और छात्र समुदाय का प्रतिनिधित्व करने में भी अहम भूमिका निभाता है. छात्र हितों से जुड़े विषयों पर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद और बातचीत में अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
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