रायपुर: बस्तर से लेकर सरगुजा तक खुले रोजगार के नए आयाम, स्थानीय लोगों को मिल रहे रोजगार
Edited By Gyanendra Sharma

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रायपुर: रोजगार के नए और स्थानीय आयामों पर कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ा रही है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक अब स्थानीय रोजगार के नए आयाम खुले हैं। पुरानी परम्पराएं अब रोजगार से जुड़कर आय का जरिया बन रही है। रोजगार का अनूठा मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय है, यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है।
रूरल इंडस्ट्रियल पार्क आज गांवों में स्थानीय रोजगार और उद्यमिता विकास का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया है। इनसे जुड़कर महिलाएं, युवा, किसान और मजदूरों समेत हर वर्ग के लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करते हुए उन्हें नवाचार, स्व-रोजगार और उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित कर रही है।
युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल कर रही है सरकार
युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक रूप देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने न केवल राजीव युवा मितान क्लब का गठन किया बल्कि युवाओं को एकजुट कर ऐसे संसाधन उपलब्ध कराए। क्लब से जुड़कर युवा स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण, स्वच्छता, पेयजल संरक्षण एवं अन्य जनजागरूकता की सामूहिक गतिविधियां कर सके। युवाओं के रोजगार की जरूरतों को समझकर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां भी निकाली हैं। इसके साथ ही निजी क्षेत्रों में संभाग स्तरीय रोजगार मेलों के नियमित आयोजनों से प्राइवेट क्षेत्रों की प्रतिष्ठित कम्पनियों में भी रोजगार के रास्ते खुल रहे हैं।
युवाओं को अनेक अवसर मिल रहे हैं
उद्यम के क्षेत्र में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से स्वरोजगार के इच्छुक युवाओं को अनेक अवसर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान युवाओं को उद्यम प्रोत्साहन देने के लिए कई नवाचारी योजनाओं का संचालन जमीनी स्तर पर किया है। रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं अपितु गांव में ही जमीन, बिजली, पानी, सड़क एवं बैंकिंग लिंकेज की सुविधा से स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस तरह सरकार स्थानीय जरूरतों के मुताबिक रोजगार उपलब्ध करा रही है।
आदिवासी बाहुल्य इलाकों पर फोकस
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर अब युवाओं को व्यवसाय के अलावा स्व-रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विशेषकर आदिवासी बाहुल्य और पिछड़े क्षेत्रों में सरकार ने परम्परागत कार्यों से लोगों को जोड़ा है और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रदान कर रही है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को न केवल संग्रहित किया जा रहा है बल्कि स्थानीय स्तर पर उनके प्रसंस्करण यूनिट्स की स्थापना और मार्केटिंग से भी जोड़ा गया है। इसी कड़ी में शहरों में सी-मार्ट की स्थापना की गई है ताकि गांवों में उत्पादित होने वाले विभिन्न प्रोडक्ट्स का विक्रय किया जा सके।
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