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पहाड़ी नदी पर बनाया 60 फीट लंबा पुल, ग्रामीणों ने खुद लिखी विकास की कहानी, पढ़ें बिहार के गांव का रोचक मामला

Bihar News: कुछ कर गुजरने की चाह हो तो कुछ नामुमकिन नहीं, इसका उदाहरण बिहार के एक गांव के लोगों ने पेश किया। जब सरकार और प्रशासन उनकी मदद नहीं कर पाया तो ग्रामीणों ने खुद हिम्मत करके अपनी 50 साल पुरानी समस्या का समाधान कर लिया।

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ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा करके अपना 50 साल का इंतजार खत्म किया।

बिहार के एक गांव के लोगों ने अपनी 50 साल पुरानी समस्या का समाधान खुद करके मिसाल पेश की है। सरकार ने मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई सरकार नदी पर पुल नहीं बना पाई। हारकर ग्रामीणों ने अपने विकास की कहानी खुद लिखी और अपनी परेशानी दूर की। ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर पहाड़ी नदी पर 60 फीट लंबा लोहे का पुल बना दिया। अब ग्रामीण नदी पार करके दूसरी ओर जाकर अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं, लेकिन सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठ गया है।

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अस्थायी पुल बहने से शहर से कट जाता संपर्क

मामला बिहार के रामनगर प्रखंड के सोनखर पंचायत स्थित शिवपुर कॉलोनी का है। जिनका गांव नदी के उस पर है, लेकिन मानसून के सीजन में नदी उफान पर बहती तो अपने साथ पुल पर बने अस्थायी बांस-बल्ली के पुल को बहा ले जाती। इससे गांव का संपर्क परिवार से कट जाता था। अकसर स्कूली बच्चों, किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को जान जोखिम में डाल नदी पार करनी पड़ती थी। कई बार मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते थे और उनकी मौत हो जाती थी।

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सरकार-अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन मिला

ग्रामीण पिछले करीब 50 साल से पहाड़ी नदी पर स्थायी लोहे का पुल बनाने की मांग कर रहे थे। कई सरकारें आई और गईं, लेकिन उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिय गया। जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई। दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन हर बार आश्वासन मिला। फाइल आगे नहीं बढ़ी और पुल का सपना अधूरा रह गया। तंग आकर ग्रामीणों ने खुद अपनी समस्या का समाधान निकाला और पंचायत के साथ बैठकर लोहे का पुल बनाने का प्लान बनाया।

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करीब ढाई लाख रुपये खर्च करके पुल बनाया

पंचायत के साथ मिलकर ग्रामीणों ने चंदा जुटाया। किसी ने 100 रुपये दिए तो किसी ने हजारों रुपये दान किए। फिर कई दिन-रात श्रमदान करके ढाई लाख रुपये में 60 फीट लंबा लोहे का पुल नदी पर बना दिया। अब गांव का संपर्क शहर से पूरा साल बना रहेगा। खेती-किसानी, शिक्षा, इलाज, शहर में रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी। लेकिन ग्रामीणो की खुद पुल बनाने की घटना ने उस सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया है, जो आधी सदी में लोगों को पुल नहीं दे सकी।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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