Bihar Election 2025: बिहार में चुनावी मौसम है। ऐसे समय में हर कार्यक्रम में जाते समय नेता अपने वोटबैंक का भी पूरा ध्यान रखते हैं। ये सिद्धांत तब और साबित हो गया जब नीतीश कुमार 8 अगस्त को पुनौरा धाम में राम जानकी मंदिर गए। लेकिन तिलक लगाने से बचे, जमीन में नहीं बैठे और मिथिला की पहचान पाग को भी एक केंद्रीय मंत्री को पहना दी। इसकी वीडियो लोगों में खूब वायरल हो गई। लोग सीएम नीतीश कुमार को ट्रोल भी करने लगे। लोगों में चर्चा रही सीएम अपना वोट बैंक बचाने के चक्कर में सेक्युलर छवि पर उंगली नहीं उठने देना चाह रहे हैं। जबकि सीएम के साथ हिंदू कट्टर नेता माने जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी थे।
क्या है पूरा विवाद?
सीतामढ़ी में बने पुनौरा धाम में मंदिर के भूमि पूजने के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे थे। साथ में बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी थे। सीएम नीतीश कुमार अपने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जैसे कई मंत्रियों के साथ राम जानकी मंदिर में दर्शन के लिए गए। मंदिर पहुंचकर सीएम और सभी ने भगवान को प्रणाम किया, जैसे ही पंडित सीएम को तिलक लगाने के लिए बढ़े, सीएम नीतीश ने मना कर दिया। पंडित ने धार्मिक पटका पहनाना चाह तो भी सीएम ने मना कर दिया। पूजा के बाद सीएम चलने लगे तो उन्हें विशेष माला पहनने को दी तो सीएम ने उसे भी मना कर दिया। अंत में पुजारी ने मिथिला की पाग दी तो सीएम ने उसे वह केंद्रीय मंत्री संजय झा को पहना दी।
सेक्युलरिज्म या फिर कुछ और…?
राम जानकी मंदिर में नीतीश ने तिलक, माला, मिथिला पाग से किनारा किया यह सेक्यूलर हो सकता है। लेकिन नीतीश कुमार की कई फोटो वायरल हो रही हैं, जिसमें वह मस्जिद में टोपी लगाए दिख रहे हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि मंदिर में धार्मिक परपंराओं से किनारा करना सेकुलरिज्म है या कुछ और। सोशल मीडिया पर भी लोगों में इसके बीच चर्चा होती रही।
अमित शाह ने दिया मिथिला को महत्व
सीएम नीतीश कुमार ने भले ही मिथिला की शान पाग को ठुकरा दिया हो। लेकिन उनकी साथी पार्टी के गृहमंत्री ने मिथिया को अहम माना। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में मैथिली भाषा, शारदा सिन्हा और मिथिला पेंटिंग का जिक्र किया। साथ ही दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति को मिथिला पेंटिंग भेंट किए जाने के बारे में भी बताया। पुनौरा धाम में मंदिर माता जानकी के मंदिर के निर्माण में 890 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसमें 137 करोड़ मंदिर निर्माण पर, जबकि 638 करोड़ परिक्रमा पथ और अन्य सुविधाओं पर खर्च होंगे।