बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रेलमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संस्थापक लालू यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. दिल्ली की एक अदालत ने IRCTC घोटाला मामले में लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत केस चलाने की मंजूरी दे दी है. लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने की मंजूरी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दी है. आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट ने LARA प्रोजेक्ट्स, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, पीसी गुप्ता, सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स, विजय कोचर और विनय कोचर के खिलाफ आरोप तय किए हैं.

राउज एवेन्यू कोर्ट ने किन्हें दी राहत?

न्यायाधीश विशाल गोगने की बेंच ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें जांच को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया गया था. कोर्ट ने कहा कि जांच की प्रकृति, उसके समय और उसके पूरे घटनाक्रम से राजनीतिक प्रतिशोध की दलील पुष्ट नहीं होती. वहीं, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सात आरोपियों को मामले से आरोपमुक्त कर दिया है. इनमें लालू प्रसाद के दामाद राहुल यादव, गौरव गुप्ता, नाथ मल कंकारिया, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव रेलन और अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

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क्या है पूरा IRCTC होटल मामला?

आपको बता दें कि मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री हुआ करते थे. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का आरोप है कि रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के रखरखाव का ठेका देने में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों होटलों का संचालन और रखरखाव सुजाता होटल्स को दिया गया था. आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और इसके बदले कथित तौर पर जमीन से जुड़े लेनदेन का लाभ पहुंचाया गया. कथित लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी की गई.

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