बिहार की 2 सहेलियों के प्यार को परिजनों के विरोध के बावजूद आजादी और मंजूरी दोनों मिल गई है. जी हां, शेखपुरा कोर्ट ने समलैंगिक शादी करने वाली दोनों सहेलियों को बालिग करार देकर साथ रहने की इजाजत दे दी है और दोनों को पुलिस सुरक्षा में कोलकाता के लिए रवाना कर दिया है. दोनों सहेलियों ने समलैंगिक शादी की तो परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी. मामला कोर्ट पहुंचा तो दोनों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया. दोनों पक्षों के सुनने के बाद कोर्ट ने सहेलियों के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें साथ रहकर अपनी मर्जी से अपने अनुसार खुलकर जिंदगी जीने की इजाजत दे दी.
दोनों ने घर से भागकर किया है समलैंगिक विवाह
समलैंगिक विवाह करने वाली लड़कियों के नाम बिहार के भागलपुर जिला निवासी नेहा और शेखपुरा जिले के गांव चेवाड़ा निवासी जन्नत है. दोनों कोलकाता में अपने-अपने परिवार के साथ रहती थीं, जहां दोनों की दोस्ती हुई और फिर दोनों ने साथ रहने का फैसला करते हुए पिछले महीने कोलकाता से निकलकर समलैंगिक विवाह कर लिया. शादी का विरोध करते हुए जन्नत के परिवार ने चेवाड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने दोनों सहेलियों पर घर लौटने का दबाव बनाया तो दोनों ने 30 अक्टूबर को कोर्ट में सरेंडर कर दिया. दोनों ने जज के सामने अपना पक्ष रखा और साथ रहने की इच्छा जताई.
जन्नत के परिजनों ने शादी का कड़ा विरोध जताया
चेवाड़ा थानाध्यक्ष ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि जन्नत के परिवार से उसे अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई्, लेकिन उसने परिवार के साथ जाने से इनकार करके नेहा के साथ रहने की इच्छा जताई. जज ने कानून के अनुसार, दोनों की इच्छा का सम्मान किया और उनके बालिग करार देकर कानून के तहत उनके अधिकारों के बारे में बताया. जज ने दोनों को अपनी इच्छा से आजाद होकर साथ रहने और जिंदगी जीने की छूट दी. जज के आदेश पर दोनों सहेलियों को पुलिस सुरक्षा में किऊल ले जाकर कोलकाता की ट्रेन में बैठाया गया. दोनों के बारे में कोलकाता पुलिस को भी जानकारी दी गई.
सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मान्यता देने से इनकार किया
बता दें कि भारत में समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता नहीं मिली है. 17 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसके पक्ष में सिर्फ 2 जज थे और 3 खिलाफ थे. वहीं विशेष विवाह अधिनियम 1954 में संशोधन करके समलैंगिंक शादी को मान्यता दी जा सकती है या इसके लिए नियम बनाए जा सकते हैं और ऐसा करने का अधिकार सिर्फ संसद या विधानसभा के पास है. इसके विपरीत संविधान के अनुच्छे 21 के तहत समलैंगिक जोड़े लिव-इन में रह सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा ले सकते हैं.