शुभम मिश्रा। Virat Kohli Test Retirement: करोड़ों भारतीय फैन्स का दिल चकनाचूर हो चुका है। भारतीय क्रिकेट की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले विराट कोहली ने अचानक ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। कोहली इस तरह अपने सबसे पसंदीदा फॉर्मेट को अलविदा कह देंगे शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा। विराट के रिटायरमेंट से पहले ही ऐसी खबरें थीं कि उन्होंने इस बात की जानकारी बीसीसीआई को दे दी थी और बोर्ड उन्हें मनाने में लगा हुआ था। मगर विराट किसी की बात नहीं समझे और 14 साल लंबे टेस्ट करियर पर फुल स्टॉप लगा दिया। हालांकि, विराट ने इस फॉर्मेट को अपने खेल और बेबाक अंदाज से वर्ल्ड क्रिकेट में उस समय पहचान दिलाई, जो टेस्ट क्रिकेट का भविष्य खतरे में था। कोहली ने अपने टेस्ट करियर में अपार सफलता हासिल की, जिसका कई क्रिकेटर्स सिर्फ सपना देखते हैं। विराट बल्लेबाज को लाजवाब रहे हैं इसके साथ ही उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को दुनिया जीतने का हुनर भी सिखाया।
बतौर बल्लेबाज कोहली के ‘विराट’ रिकॉर्ड
14 साल के लंबे टेस्ट करियर में विराट कोहली ने बतौर बल्लेबाज सबकुछ हासिल किया। कोहली टेस्ट क्रिकेट में पहली बार बल्ला थामकर साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैदान पर उतरे थे। तब शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि कोहली इस फॉर्मेट में इतने ‘विराट’ बनकर अलविदा लेंगे। भारत के लिए सफेद जर्सी में कोहली ने 123 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान खेली 210 पारियों में किंग कोहली ने 46 की औसत से 9,230 रन बनाए। विराट के बल्ले से 30 शतक निकले, तो 31 बार उन्होंने पचास का आंकड़ा पार कर किया।
कोहली के बेमिसाल रिकॉर्ड
साल 2012, 2015, 2016, 2018 और 2023 में कोहली ने सबसे ज्यादा रन ठोकने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। कप्तान के तौर पर भारत की ओर से सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड आज भी कोहली के नाम दर्ज है। साल 2019 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोहली ने नाबाद 254 रन ठोके थे। बतौर कप्तान भारत की ओर से सबसे ज्यादा सेंचुरी विराट के बल्ले से निकली। कोहली ने कप्तान रहते हुए 20 शतक जमाए। कैप्टन के तौर पर भारत की ओर से टेस्ट में सबसे ज्यादा रन विराट के बल्ले से आए। कप्तान कोहली ने 5864 रन ठोके और अभी उनके आसपास कोई नहीं है। कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा दोहरे शतक लगाने का रिकॉर्ड भी विराट के नाम है।
बेबाक कप्तानी कोई जवाब ही नहीं
ऑस्ट्रेलिया का किला भेदा, वेस्टइंडीज को उसी की धरती पर धूल चटाई, इंग्लैंड की सरजमीं पर ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती और श्रीलंका को भी घर में घुसकर 3-0 से रौंद डाला। विराट कोहली के कप्तानी संभालने से पहले घर के बाहर टेस्ट सीरीज जीतना टीम इंडिया के लिए खूबसूरत सपना हुआ करता था। मगर कैप्टन विराट इस सपने को हकीकत में बदलते चले गए। कोहली ने भारतीय टीम को दुनिया जीतने का हुनर सिखाया। कोहली की आक्रामक कप्तानी के आगे अपने ही घर में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड जैसी टीमें बैकफुट पर नजर आईं। कोहली ने अपनी कैप्टेंसी में तेज गेंदबाजों की ऐसी फौज तैयार की, जिसके दम पर उन्होंने वर्ल्ड क्रिकेट में टीम इंडिया को वो ओदा दिलाया, जिसका सिर्फ ख्वाब देखा जाता था।
कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में कुल 68 मैचों में टीम की बागडोर संभाली। इस दौरान भारत की झोली में 40 मैचों में जीत आई, तो 11 मुकाबलों का अंत ड्रॉ के रूप में हुआ। कोहली की कैप्टेंसी में भारत ने सिर्फ 17 टेस्ट मैचों में हार का सामना किया। बतौर कप्तान विराट का जीत प्रतिशत 58.82 का रहा और वह क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में भारत के सबसे सफल कप्तान रहे। कोहली के रिटायरमेंट से सिर्फ भारतीय क्रिकेट ही नहीं, बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट में भी वो खालीपन आएगा, जिसकी शायद कभी भरपाई नहीं हो सकेगी।