Lionel Messi: फुटबॉल की दुनिया का असली 'GOAT' या कहूं 'ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम'कौन है? यह एक ऐसी बहस है जो चाय-कॉफी की चुस्कियों और समोसे-पिज्ज़ा की प्लेट के साथ सदियों तक चलती रहेगी. हर दौर के अपने सुरमा रहे हैं. एक थे पेले जिन्होंने तीन-तीन वर्ल्ड कप और अपने जादुई खेल से खुद को फुटबॉल का उस्ताद साबित किया. फिर माराडोना आए उन्होंने भी 1986 में अकेले अपने ही दम पर अर्जेंटीना को फुटबॉल का ताज पहना दिया. फिर आए क्रिस्टियानो रोनाल्डो, जिम में तराशा हुआ फौलादी बदन और गोल दागने की मशीन. लेकिन लियोनेल मेसी? मैं कहता हूं मेसी इस बहस को ही डिलीट कर देते हैं. उन्हें मैदान पर खेलते देखना एक अलग ही नशा है. जिसे देखकर अक्सर मन में आता है कि भाई, ये हाड़-मांस का इंसान है या भगवान ने इसे धरती पर फुटबॉल की जॉयस्टिक देकर भेजा है कि 'जा बेटा, जी भर के खेल!'
बीमारी से बार्सिलोना के किंग का सफर
मुझे याद है कि अर्जेंटीना ने जब 2021 में ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका जीता था, तो मेसी की ज़िंदगी के अतीत को जानने को लेकर तलब उठी थी. इसी के बाद मेसी को लेकर एक डॉक्युमेंट्री देखने को मजबूर हो गया था. पता चला कि मेसी की कहानी तो किसी परियों की कहानी जैसी है, जो हमारी हिंदी फिल्मों के हीरो की ज़िंदगी की तरह बेहद कठिन संघर्षों से गुज़री है.
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आप में से शायद कुछ लोग ना जानते हों तो बता दूं कि अर्जेंटीना के एक छोटे से शहर रोसारियो में जन्मे इस लड़के को बचपन में 'ग्रोथ हार्मोन डेफिसिएंसी' नाम की बीमारी थी. पैर छोटे थे और परिवार के पास इलाज के महंगे पैसे नहीं थे. लेकिन फिर स्पेन के फुटबॉल क्लब बार्सिलोना ने इस छोटे कद के लड़के में छुपी असाधारण प्रतिभा को पहचाना. उन्होंने मेसी के इलाज का खर्च उठाया और उसे अपनी 'ला मासिया' एकेडमी में शामिल किया. जिसके बाद मेसी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
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वर्ल्ड कप 2026 और 'मेसी का मैजिक'
मेसी भले ही अर्जेंटीना के कप्तान हैं लेकिन उनके चाहने वाले पूरी दुनिया में मौजूद है. 2026 फीफा विश्व कप में भी मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक ठोक टूर्नामेंट इतिहास में अपने 16 गोल पूरे कर लिए. अब मेसी ने जर्मनी के मिरोस्लाभ क्लोज के सबसे ज़्यादा वर्ल्ड कप गोल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली है. अपने छठे वर्ल्ड कप और 200वें इंटरनेशनल मैच में खेल रहे इस जादुई खिलाड़ी के पीछे रिकॉर्ड्स खुद भागते हैं. लेकिन मेसी का असली जादू आंकड़ों से परे उनके खेल में है.
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महान कोच पेप गार्डियोला ने एक बार मेसी को लेकर कहा था कि 'इतनी रफ़्तार में गेंद को पैरों से चिपकाना फिजिक्स के खिलाफ है.' अब किसी को कुछ भी लगे लेकिन मेसी मैदान पर चुपचाप टहलते हुए विपक्षी टीम को ऐसे स्कैन करते हैं, जैसे कोई डॉक्टर एक्स-रे देख रहा हो. वो भांप लेते हैं कि डिफेंस में कमजोरी कहां है, और फिर अचानक एक ऐसा जादुई पास निकालते हैं कि सामने वाली टीम चित हो जाती है. मेसी के खेल में टैलेंट, ग्रेस और मॉडर्न फुटबॉल साइंस का तड़का लगा है.
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रोनाल्डो और मेसी की तुलना कितनी सही?
अक्सर लोग रोनाल्डो और मेसी की तुलना करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि दोनों में एक बड़ा फर्क है. रोनाल्डो कमाल के खिलाड़ी हैं, पेनाल्टी बॉक्स के असली शहंशाह. ऐसा लगता है कि उन्हें बॉल दो, वो गोल करके काम खत्म कर देंगे. उनका अपना एक अलग स्वैग है. पर मेसी… उन्हें सिर्फ एक प्लेयर कहना सही नहीं होगा. मेरी नज़र में मेसी पूरा फुटबॉल इंस्टीट्यूट हैं. वे खुद ही स्क्रिप्ट लिखते हैं, खुद ही डायरेक्ट करते हैं और क्लाइमेक्स में हीरो बनकर गोल भी खुद ही दाग देते हैं.
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मेसी को गोल करने के लिए पीछे से किसी सॉलिड सपोर्ट या जादुई पास की ज़रूरत नहीं होती. मिडफील्ड में पीछे से आना, बॉल छीनना, मूव्स बनाना और फिर पूरे डिफेंस को चीरते हुए गोल पोस्ट में घुस जाना. यही तो है मेसी का मैजिक. एक दिलचस्प आंकड़ा बताता हूं, मेसी के नाम 800 से ज्यादा गोल तो हैं ही, लेकिन फुटबॉल इतिहास में सबसे ज्यादा 'असिस्ट' यानी दूसरों से गोल करवाना भी उन्हीं के नाम दर्ज है. मतलब साफ है, बंदा सिर्फ खुद लाइमलाइट नहीं लूटता, बल्कि पूरी टीम के लिए मौके बनाता है.
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पेले-माराडोना के क्लासिक दौर से भी आगे
पुराने ज़माने के फैंस अक्सर पेले और माराडोना का रोब झाड़ते हैं, मेरे पिता कहा करते थे कि जो खेल माराडोना का हुआ करता था उसकी किसी से तुलना नहीं कर सकते. लेकिन बॉस, हमें यह मानना होगा कि आज का मॉडर्न फुटबॉल बहुत बेरहम और गलाकाट हो चुका है. आज मैदान पर सांस लेने की फुर्सत नहीं मिलती. फिटनेस, स्पीड और माइंड गेम सब 10 गुना मुश्किल हो चुके हैं.
इसी मुश्किल दौर में मेसी पर सालों तक यह ताना मारा गया कि 'यह बार्सिलोना का शेर है, अर्जेंटीना के लिए ढेर है' लेकिन इस शेर ने अपनी खामोशी से सबका मुंह बंद कर दिया. पहले 2021 में ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका जीता और फिर आया 2022 का वो यादगार कतर वर्ल्ड कप. 35 साल की उम्र में, जहां खिलाड़ी संन्यास का मन बनाने लगते हैं, मेसी ने हर नॉकआउट मैच में गोल दागा, फाइनल के थ्रिलर में दो गोल किए और अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाकर ही दम लिया. 2026 में भी उम्मीदें एक बार फिर ज़िंदा हो उठी हैं.
सादगी और आंकड़ों के साथ 'नो-ड्रामा'!
जो और चीज़ जो मुझे मेसी का सबसे बड़ा फैन बनाती है, वो है उनकी सादगी और नो-ड्रामा एटीट्यूड. जहाां मॉर्डन फुटबॉल के कई दूसरे दिग्गजों में 'I, Me, Myself' वाला ईगो दिखता है, वहीं मेसी अपनी टीम में एकदम डाउन-टू-अर्थ दिखते हैं. मैदान पर पेनाल्टी मारनी हो, तो वे मुस्कुराकर अपने साथी खिलाड़ी को दे देते हैं कि उसका कॉन्फिडेंस बढ़ सके. बोलने वाले फिर कहेंगे कि ये सब तो उस खिलाड़ी में भी है, इस खिलाड़ी में भी है… फिर मेसी ही क्यों? तो जवाब है कि जिसके पास 8 बैलॉन डी'ओर हों, देश के लिए कोपा अमेरिका और हाथ में चमचमाता वर्ल्ड कप हो, क्लब फुटबॉल की हर ट्रॉफी हो, दुनिया भर में दीवाने फैंस हो… अब उसे खुद को साबित करने के लिए और क्या चाहिए? पेले अपने दौर के बेताज बादशाह थे, माराडोना अर्जेंटीना की रूह थे और रोनाल्डो मॉडर्न फिटनेस के अल्टीमेट पोस्टर बॉय हैं. लेकिन मेसी इन सबका एक सुपर-रिफाइंड निचोड़ हैं, लगातार 20 साल तक राज करना कोई तुक्का नहीं. निष्कर्ष यही है कि आने वाली पीढ़ियां जब इस दौर को याद करेंगी, तो गर्व से कहेंगी कि 'हमने मेसी का दौर देखा है.'
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