India vs New Zealand 4th T20I: भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में टीम इंडिया को 87 रनों से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. शुक्रवार 30 अक्तूबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क में हुए इस मैच में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी. हालांकि, न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली और निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 259 रन बना दिए. जवाब में भारतीय टीम लक्ष्य हासिल करने के दबाव में बिखर गई और 172 रन ही बना सकी.
इस हार के पीछे केवल गेंदबाजों का महंगा प्रदर्शन जिम्मेदार नहीं था, बल्कि टीम चयन से लेकर बल्लेबाजी और गेंदबाजी की रणनीति तक कई फैसले भारत के खिलाफ गए. तीन ऐसी बड़ी वजहें रहीं, जिन्होंने मुकाबले में टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा दीं.
वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 से बाहर रखना
न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से काफी प्रभावित किया था. उन्होंने महज 19 गेंदों का सामना करते हुए 45 रन बनाए थे. उनकी इस पारी में चार चौके और चार छक्के शामिल थे, जबकि स्ट्राइक रेट 236.84 का रहा था. इतनी शानदार पारी खेलने के बावजूद उन्हें चौथे मुकाबले की प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिली.
बड़े लक्ष्य के सामने भारतीय टॉप ऑर्डर ने किया निराश
260 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने के लिए भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाना था. लेकिन टीम के शुरुआती बल्लेबाज इस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहे. पारी की शुरुआत करने उतरे संजू सैमसन केवल चार रन बनाकर आउट हो गए. वहीं, अभिषेक शर्मा ने 15 गेंदों पर 27 रन जरूर बनाए, लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके.
तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए ईशान किशन भी बिना खाता खोले ही अपना विकेट गंवा बैठे. नतीजा यह रहा कि भारतीय टीम ने शुरुआती तीन विकेट महज 50 रनों के भीतर गंवा दिए. इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय शुरुआती झटकों ने टीम की रन गति और रणनीति दोनों को प्रभावित किया. टॉप ऑर्डर के जल्दी बिखरने के बाद मध्यक्रम पर दबाव बढ़ गया और भारत के लिए मुकाबले में वापसी करना मुश्किल हो गया.
पार्ट टाइम गेंदबाजों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता
न्यूजीलैंड की पारी के दौरान भारतीय गेंदबाजी संयोजन भी सवालों के घेरे में रहा. बल्लेबाजी में ज्यादा विकल्प रखने की रणनीति के चलते टीम को कुछ मौकों पर पार्ट टाइम और अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ा. इसका असर नितीश कुमार रेड्डी के प्रदर्शन में भी देखने को मिला. उन्होंने अपने कोटे के पूरे चार ओवर किए, लेकिन इस दौरान 64 रन खर्च कर दिए. उनकी इकॉनमी 16 रन प्रति ओवर रही.