शुभम मिश्रा। Mohammad Siraj: कहते हैं कि किस्मत बहादुरों का साथ देती है। हालांकि, बहादुरी, जीतने का जज्बा और हार ना मानने की जिद के बावजूद मोहम्मद सिराज किस्मत के आगे हार गए। चेहरे पर वो बेबसी, झुके हुए कंधे, सिर और मैदान को ना छोड़ पाने की हिम्मत। रोमांच से भरे मुकाबले में हार के बाद लॉर्ड्स के मैदान पर घुटने के बल बैठे सिराज को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। 54 गेंदें खेलकर जसप्रीत बुमराह जब पवेलियन लौटे, तो हर किसी ने टीम इंडिया की हार तय मान ली थी। हर किसी का सोचना यही था कि सिराज जोफ्रा आर्चर, क्रिस वोक्स और बेन स्टोक्स जैसे चतुर और तेज गेंदबाजों के आगे ज्यादा देर क्रीज पर टिक नहीं पाएंगे। हालांकि, मियां भाई तो ड्रेसिंग रूम से कुछ और ही सोचकर उतरे थे।
सिराज के हर डिफेंस पर तालियों की गड़गड़ाहट से स्टेडियम गूंज रहा था। सिराज के बल्ले से आते हर एक रन पर मैदान पर इतना शोर मच रहा था कि मानो किसी बल्लेबाज ने शतक ठोक डाला हो। बुमराह जब आउट हुए तो टीम इंडिया के स्कोर बोर्ड पर 147 रन लगे थे। मगर सिराज जडेजा के साथ मिलकर टीम को 170 रनों तक ले आए थे। जो मैच पहले सेशन में ही खत्म होता हुआ नजर आ रहा था वो तीसरे सेशन में पहुंच चुका था। अब हार का डर मन से निकल रहा था और जीत की उम्मीदें जगाने लगी थीं। सबकुछ तो सही चल रहा था, लेकिन फिर शोएब बशीर की एक गेंद ने करोड़ों फैन्स का दिल तोड़ दिया। बशीर की गेंद पर सिराज ने सॉलिड डिफेंस तो किया, पर बस यहीं किस्मत उनके और भारतीय टीम के साथ खेल कर गई।
किस्मत ऐसा धोखा किसी को ना दे!
सिराज के डिफेंस करने के बाद गेंद टप्पा खाई और स्टंप की तरफ बढ़ गई। सिराज इधर-उधर देखने लगे कि बॉल बल्ले से लगने के बाद किसी तरफ गई है। मियां भाई इससे पहले कुछ समझ पाते कि गेंद स्टंप पर जा लगी और बेल्स नीचे गिर पड़ी। इंग्लैंड के लिए वो पल आ चुका था, जिसका इंतजार वो पिछले दो सेशन से कर रहे थे। इंग्लिश खेमे में जश्न शुरू हो गया था और प्लेयर्स मैदान पर खुशियां मना रहे थे। दूसरी ओर, सिराज किस्मत के इस खेल पर यकीन ही नहीं कर पा रहे थे। सिराज कुछ देर मैदान पर ही खड़े रहे और फिर बल्ले नीचे रखकर बैठ गए। सिराज का सिर बल्ले पर था और चेहरे पर मायूसी और दर्द साफतौर पर झलक रहा था। 39 मैचों के अपने टेस्ट करियर में सिराज ने इतने धैर्य के साथ शायद पहली बार बल्लेबाजी की होगी।
लॉर्ड्स याद रखेगा 4 रनों की यह पारी
जोफ्रा आर्चर, क्रिस वोक्स, ब्रायडन कार्स जैसे फास्ट बॉलर्स के खिलाफ नंबर 11 के बल्लेबाज का 30 गेंदें खेल जाना बहुत बड़ी बात है। भले ही टीम इंडिया यह मैच हार गई, लेकिन लॉर्ड्स का मैदान सिराज की 4 रनों की इस पारी को लंबे समय तक याद रखेगा। यह वो पारी थी, जिसने टेस्ट क्रिकेट के रोमांच को कुछ पलों के लिए ही सही मगर जिंदा जरूर कर दिया था। सिराज की इस इनिंग ने साबित करके दिखाया कि क्यों क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, जहां आखिरी गेंद और आखिरी विकेट गिरने तक विपक्षी टीम की हार तय नहीं मानी जाती है।