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मुख्य बिंदु

  • वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि पानी दो अलग-अलग लिक्विड स्ट्रक्चर के बीच बदल सकता है.
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पानी में छिपे हुए मॉलिक्यूलर पैटर्न का पता लगाने में मदद की.
  • ये रिसर्च 4 जून 2026 को ‘नेचर फिजिक्स’ जर्नल में पब्लिश हुई थी.
  • ये नतीजे पानी की कई अजीब फिजिकल प्रॉपर्टीज को एक्सप्लेन कर सकते हैं.
  • थ्योरी की पूरी तरह कंफर्म होने से पहले और एक्सपेरिमेंट्स की जरूरत है.

Water May Exist as Two Different Liquid Forms: वैज्ञानिकों का लंबे समय से मानना ​​रहा है कि पानी मॉलिक्यूलर लेवल पर 2 अलग-अलग लिक्विड स्टेट्स में मौजूद हो सकता है- एक ज्यादा डेंस (घना) रूप और एक कम डेंस रूप, जो लगातार एक-दूसरे में बदलते रहते हैं. हालांकि इस थ्योरी पर दशकों से चर्चा हो रही है, लेकिन इसके लिए सीधे मॉलिक्यूलर सबूत मिलना मुश्किल रहा है. अब एक नई स्टडी ने दावा किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने रिसर्चर्स को इस विचार के लिए मजबूत सबूत खोजने में मदद की है.

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इस जर्नल में छपी रिसर्च

4 जून को ‘नेचर फिजिक्स’ जर्नल में पब्लिश हुई ये रिसर्च बताती है कि पानी की अजीब प्रॉपर्टीज शायद 2 मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर के बीच लगातार होने वाले इस बदलाव का नतीजा हो सकती हैं. ज्यादातर लिक्विड्स के उलट, पानी जमने पर फैलने से पहले तकरीबन 4 डिग्री सेल्सियस पर अपनी सबसे ज्यादा डेंसिटी तक पहुँचता है, जिससे बर्फ तैर पाती है. यह अजीब विस्कोसिटी (गाढ़ापन) और गर्मी बनाए रखने की खासियतें भी दिखाता है, जिन्होंने सालों से वैज्ञानिकों को उलझन में डाला हुआ है.

कैसे की गई रिसर्च?

इस रहस्य की जांच करने के लिए, रिसर्चर्स ने लाखों पानी के मॉलिक्यूल्स से जुड़े एडवांस्ड मॉलिक्यूलर सिमुलेशन का इस्तेमाल किया. उन्होंने इन सिमुलेशन को अनसुपरवाइज्ड डीप लर्निंग के साथ जोड़ा, जिससे AI बिना किसी पहले के निर्देश के छिपे हुए पैटर्न की पहचान कर सका. सिस्टम ने लाखों डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस किया और उन अहम वेरिएबल्स की पहचान की जो बताते हैं कि पानी के मॉलिक्यूल्स कैसे डेंस और कम-डेंस अरेंजमेंट के बीच बदलते हैं.

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स्टडी के नतीजे

स्टडी में ये भी पाया गया कि ये मॉलिक्यूलर बदलाव आस-पास की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग रास्तों से होते हैं. सामान्य परिस्थितियों में, ये बदलाव एक रिलेटिवली सिंपल रूट से होता है, जबकि क्रिटिकल ट्रांजिशन बाउंड्रीज के पास ये प्रक्रिया ज्यादा जटिल हो जाती है, जिसमें कई एनर्जी बैरियर्स शामिल होते हैं.

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और ज्यादा एक्सपेरिमेंट की जरूत

हालांकि ये नतीजे लंबे समय से चली आ रही 2-स्टेट वाली हाइपोथिसिस का मजबूती से समर्थन करते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि नतीजों की पुष्टि के लिए और ज्यादा लेबोरेटरी प्रयोगों की जरूरत होगी. अगर ये कंफर्म हो जाता है, तो ये खोज पानी के बिहेवियर को समझने में सुधार कर सकती है और बायोलॉजिकल सिस्टम, फार्मास्यूटिकल्स, केमिस्ट्री और मटीरियल साइंस में अहम जानकारी दे सकती है, जहां पानी अनगिनत प्राकृतिक और औद्योगिक प्रक्रियाओं में अहम रोल अदा करता है.

निष्कर्ष

ये स्टडी नेचर के सबसे फैमिलयर लेकिन रहस्यमयी पदार्थों में से एक को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एडवांस्ड मॉलिक्यूलर सिमुलेशन के साथ जोड़कर, रिसर्चर्स ने पानी की 2-स्टेट वाली थ्योरी का समर्थन करने वाले ठोस सबूत इकट्ठा किए हैं. हालांकि अभी भी एक्सपेरिमेंटल कंफर्मेशन की जरूरत है, लेकिन इन नतीजों का असर केमिस्ट्री, बायोलॉजी, मेडिसिन और मटीरियल साइंस में फ्यूचर की रिसर्च पर पड़ सकता है. इससे जीवित जीवों और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में पानी के बिहेवियर के बारे में हमारी समझ बेहतर हो सकती है.

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First published on: Jun 26, 2026 11:18 AM

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Shariqul Hoda

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