दुनिया के कई मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो (El Nino) के लगातार मजबूत होने को लेकर चिंता जताई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम घटना अब असामान्य स्तर तक पहुंचती दिख रही है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी विश्व मौसम संगठन (WMO) ने भी चेतावनी दी है कि इस साल का अल नीनो 1950 के बाद दर्ज किए गए सबसे मजबूत अल नीनो में शामिल हो सकता है. WMO के मुताबिक, अल नीनो की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रह सकता है. साथ ही, यह पहले से बढ़ रहे मानवजनित जलवायु परिवर्तन के असर को और गंभीर कर सकता है.
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम और जलवायु घटना है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ता है. इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है. इसका असर वैश्विक तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है. कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. अल नीनो आमतौर पर हर दो से सात साल के बीच आता है.
धरती का बड़ा हिस्सा लाल रंग में दिखा
मौसम विज्ञानी रयान माउ ने पूरी धरती का एक जलवायु मानचित्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया. इस नक्शे में धरती का बड़ा हिस्सा लाल रंग में नजर आ रहा है, जो सामान्य से अधिक गर्म तापमान का संकेत है. रयान माउ ने कहा कि अल नीनो सर्दियों तक अपनी ‘अधिकतम ताकत’ पर बना रह सकता है. उनके अनुसार, फरवरी 2027 तक इसके जारी रहने की संभावना है.
3.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा तापमान
जलवायु वैज्ञानिक जीक हाउसबफादर ने भी अल नीनो के तेजी से मजबूत होने की बात कही. उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर के Nino 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3.4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है. उनका कहना है कि यह अब तक दर्ज किसी भी अल नीनो घटना की तुलना में बेहद अधिक है. मौसम विशेषज्ञ लियोन सिमंस ने इस स्थिति को ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ तक कह दिया है.
अक्टूबर से दिसंबर के बीच रिकॉर्ड गर्मी की आशंका
WMO ने कहा है कि 2026 के आखिरी महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक रहने की बहुत अधिक संभावना है. अल नीनो के केंद्र माने जाने वाले मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अक्टूबर से दिसंबर के बीच समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है. यह रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है.
4.51 लाख तक अतिरिक्त मौतों का अनुमान
शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं ने पिछले महीने अनुमान लगाया था कि इस साल का ‘सुपर अल नीनो’ दुनिया भर में बड़ी संख्या में अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच इसके चलते दुनिया में 4.51 लाख तक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के साथ बढ़ता वैश्विक तापमान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और गंभीर बना सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम के बदलाव पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी.
संबंधित खबरें
फ्रांसिस हैल्जेन ने जीता फिजिक्स का नोबेल प्राइज 2026
2 days ago'ऑप्टोजेनेटिक्स' पर काम करने वाले 3 साइंटिस्ट्स को मेडिसिन में नोबेल प्राइज
3 days agoखतरे में है कैलिफोर्निया! प्रशांत महासागर में पनप रहा है El Nino
6 days agoSpaceX का रॉकेट Starship लॉन्च, वहां जाने का इरादा जहां कोई इंसान न गया हो
10 days agoअंतरिक्ष में मिल गया जीवन? करोड़ों किमी दूर एक ग्रह से आ रहे रेडियो सिग्नल
12 days agoAI बताएगा बारिश का हाल, लेकिन 2070 की तैयारी आज से करनी होगी
13 days agoचक्रवात का कैसे पड़ा नाम 'अर्नब', क्या मचाने वाला है कोहराम?
16 days agoSunita Williams: 'पृथ्वी पर किस चीज को हम लेते हैं फॉर ग्रांटेड, जो स्पेस में नहीं?'
29 days agoमौसम का सितम नहीं झेल पाएंगे भारत के ये शहर! दुनिया के टॉप 20 'डेंजर' सिटी में शामिल
30 days ago'बेबुनियाद और गलत', ISRO ने निजीकरण की अफवाहों पर दिया करारा जवाब
32 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines