भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' द्वारा विकसित देश का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-I' अंतरिक्ष में अपनी पहली उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है. हाल ही में इस अत्याधुनिक रॉकेट की पहली आधिकारिक तस्वीर भी जारी कर दी गई है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) में विक्रम-I के 'स्टेज-2 इंटीग्रेशन' का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिसके बाद इसकी लॉन्चिंग की उल्टी गिनती शुरू मानी जा रही है.

एपीजे अब्दुल कलाम को समर्पित


यह बहुप्रतीक्षित रॉकेट कुल चार चरणों (फोर-स्टेज) वाली लॉन्चिंग प्रणाली पर आधारित है. इसके दूसरे चरण के एकीकरण का काम पूरा हो चुका है, जिसे महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को समर्पित करते हुए 'कलाम-250' नाम दिया गया है. शेष दो चरणों की अंतिम प्रक्रियाओं के पूरा होते ही इसे अंतरिक्ष की कक्षा की ओर रवाना कर दिया जाएगा.

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क्या है रॉकेट की खासियतें?


विक्रम-I रॉकेट की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह से स्वदेशी होना और इसकी अनूठी बनावट है. इसे अत्यधिक मजबूत लेकिन बेहद हल्का बनाया गया है. रॉकेट की मुख्य बॉडी को स्टील से भी अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए विशेष कार्बन कम्पोजिट मैटेरियल से तैयार किया गया है. अंतरिक्ष यात्रा के दौरान जब रॉकेट के भीतर ठोस ईंधन जलता है, तो अत्यधिक उच्च तापमान और गर्मी पैदा होती है. इस भीषण गर्मी से रॉकेट के संवेदनशील उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए इसमें रबर की एक विशेष थर्मल सुरक्षा परत (कवच) लगाई गई है.

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हाईटेक नेविगेशन और गाइडेंस


तकनीकी रूप से इसे बेहद सटीक और संवेदनशील बनाया गया है. इसमें उन्नत नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो तीव्र हवा के थपेड़ों और गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के बदलावों के बीच भी रॉकेट को अपने निर्धारित पथ से भटकने नहीं देगा. इसके अलावा, इसमें कंप्यूटर संचालित रोबोटिक पुर्जे लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान इसके नोजल को स्वचालित रूप से सही दिशा में घुमाते रहेंगे. मिशन के दौरान रॉकेट का जो हिस्सा अपना काम पूरा कर बेकार हो जाएगा, वह पलक झपकते ही मुख्य बॉडी से खुद को अलग कर लेगा.

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