हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

कब्र में कितने साल तक रहती हैं इंसान की हड्डियां? जानिए कब पूरी तरह मिट्टी में मिल जाता है शरीर

मौत के बाद इंसान के शरीर का क्या होता है और कब्र में दफनाने के बाद हड्डियां कितने साल तक सुरक्षित रहती हैं? ये सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है. आइए जानते हैं कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है और किन परिस्थितियों में शरीर पूरी तरह मिट्टी में मिल जाता है.

विज्ञापन
Credit: AI

मौत ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच है. लेकिन मृत्यु के बाद इंसान के शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं और कब्र में दफनाने के बाद हड्डियां कितने समय तक सुरक्षित रहती हैं, ये सवाल लोगों की जिज्ञासा का विषय बना रहता है. विज्ञान के मुताबिक, शरीर के मिट्टी में मिलने की प्रक्रिया कई बातों पर निर्भर करती है. इसमें मिट्टी की क्वालिटी, तापमान, नमी, ऑक्सीजन की मौजूदगी और ताबूत का टाइप अहम भूमिका निभाते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौत के तुरंत बाद शरीर का डिकम्पोजिशन शुरू हो जाता है. पहले शरीर के मुलायम अंग और त्वचा धीरे-धीरे सड़ने लगते हैं. कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षों के भीतर शरीर के अधिकांश नरम हिस्से खत्म हो जाते हैं और अंत में केवल हड्डियां बचती हैं.

ये भी पढ़ें: दुनिया में कहां बहता है ‘खूनी झरना’? वैज्ञानिकों ने सुलझाया लाल पानी का 100 साल पुराना रहस्य

हड्डियों को खत्म होने में कितना समय लगता है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सामान्य हालातों में इंसान की हड्डियां पूरी तरह मिट्टी में मिलने में लगभग 50 से 80 साल तक का समय ले सकती हैं. हालांकि ये कोई तय अवधि नहीं है. अगर मिट्टी सूखी है, तापमान कम है या ऑक्सीजन की मात्रा कम है तो हड्डियां इससे भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सकती हैं.
वहीं, गर्म और नम वातावरण में शरीर और हड्डियों का डिकम्पोजिशन तेजी से होता है. कई बार मिट्टी की रासायनिक संरचना भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती है.

विज्ञापन

किन बातों पर निर्भर करती है ये प्रक्रिया?

शरीर के डिकम्पोजिशन की स्पीड कई प्राकृतिक कारणों से प्रभावित होती है, जैसे-
-मिट्टी का टाइप और उसकी एसिडिटी
-तापमान और मौसम
-नमी का स्तर
-ऑक्सीजन की उपलब्धता
-कब्र की गहराई
-ताबूत लकड़ी का है या धातु का

क्या हर जगह एक जैसा होता है डिकम्पोजिशन?

नहीं. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु और मिट्टी की स्थिति अलग होती है. इसी वजह से किसी जगह पर शरीर जल्दी मिट्टी में मिल जाता है, जबकि कहीं ये प्रोसेस कई दशक तक चल सकती है. ठंडे इलाकों में शरीर लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है, जबकि गर्म और ह्युमिड इलाकों में डिकम्पोजिशन तेजी से होता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि मृत्यु के बाद शरीर का डिकम्पोजिशन पूरी तरह नेचुरल प्रोसेस है. समय के साथ शरीर के सभी अंग और अंत में हड्डियां भी मिट्टी का हिस्सा बन जाती हैं. हालांकि ये प्रक्रिया हर व्यक्ति और हर जगह पर अलग-अलग समय ले सकती है. यही वजह है कि किसी भी कब्र में हड्डियों के पूरी तरह मिट्टी में बदलने का कोई एक निश्चित समय तय नहीं किया जा सकता. फिर भी सामान्य हालातों में ये प्रक्रिया कई दशकों तक चल सकती है.

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: समुद्र में भी बन रहे ‘कब्रिस्तान’, उबलते समुद्र से भारत में यहां पर खत्म हो रहे कोरल रीफ्स

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola