महाराष्ट्र का किसान जानना चाहता है कि अगले 3 से 10 दिनों में कितनी बारिश होगी. वहीं, इंजीनियर को यह समझना है कि 2070 के आसपास मानसून कैसा हो सकता है, ताकि आज बनाए जा रहे नाले और ड्रेनेज सिस्टम लंबे समय तक काम कर सकें. विज्ञान इन दोनों सवालों का जवाब दे सकता है, लेकिन दोनों की सटीकता अलग होगी.
मानसून का अनुमान लगाना मुश्किल क्यों है?
मानसून पर जमीन और समुद्र के तापमान का अंतर, प्रशांत और हिंद महासागर का तापमान, हिमालय की हवाएं और गंगा के मैदानी इलाकों में प्रदूषण से पैदा होने वाले एरोसोल असर डालते हैं. ये सूरज की रोशनी को प्रभावित करने के साथ बादल बनने में भी मदद कर सकते हैं. बारिश वाले बादल कुछ किलोमीटर के छोटे इलाके में बनते हैं, जबकि मौसम के कंप्यूटर मॉडल 10 से 100 किलोमीटर के बड़े इलाकों में हिसाब लगाते हैं. इसलिए बादलों की छोटी गतिविधियों को सही तरीके से पकड़ना मुश्किल होता है. यही वजह है कि कई मॉडल भारत में बारिश कम और समुद्र में ज्यादा दिखाते हैं. 1950 से 2000 के बीच मानसूनी बारिश में 5-10 फीसदी कमी भी ज्यादातर मॉडल सही नहीं पकड़ पाए.
AI से बेहतर हो सकता है मौसम का अनुमान
पिछले 40 साल से ज्यादा समय के सैटेलाइट और जमीन से मिले डेटा से AI सीख सकता है कि मौसम एक दिन से दूसरे दिन कैसे बदलता है. AI वाले मौसम मॉडल कई मामलों में पुराने मॉडल से बेहतर नतीजे दे रहे हैं और GPU यानी तेज कंप्यूटर चिप की मदद से मिनटों में काम कर सकते हैं. इससे किसानों को बारिश का बेहतर अनुमान और मानसून के ज्यादा बारिश या कम बारिश वाले दौर की जानकारी मिल सकती है. AI हीट वेव यानी खतरनाक गर्मी का अनुमान लगाने में भी मदद कर सकती है.
2070 के लिए AI अकेली काफी नहीं
गर्म वातावरण ज्यादा नमी रखता है. अगर दुनिया 2-3 डिग्री ज्यादा गर्म होती है, तो 10 साल में एक बार होने वाली भारी बारिश 15-20 फीसदी ज्यादा तेज हो सकती है. 100 साल में होने वाली बेहद भारी बारिश आज के रिकॉर्ड से भी आगे जा सकती है. लेकिन 2070 की जलवायु के लिए हमारे पास पर्याप्त डेटा नहीं है. इसलिए भौतिक विज्ञान पर आधारित Climate Models जरूरी रहेंगे. कुछ मामलों में AI और इन मॉडल्स को मिलाकर काम किया जा सकता है. फिर भी यह साफ नहीं है कि किस इलाके में बारिश कितनी बढ़ेगी, मानसून कब आएगा और कितना बदलाव होगा.
भारत के पास अपनी तैयारी की क्षमता
भारत के पास बड़ा सॉफ्टवेयर और मशीन लर्निंग टैलेंट पूल, मानसून का लंबा डेटा और इंडिया AI मिशन के तहत 45,000 से ज्यादा Shared GPUs हैं. यूनिवर्सिटी और स्टार्टअप्स भी क्षेत्रीय मौसम मॉडल बना सकते हैं. इसके लिए ज्यादा Weather Radars, Rain Gauges और Ocean Buoys से डेटा जुटाना होगा. किसानों के लिए ऐप्स और अहमदाबाद के हीट एक्शन प्लान जैसी व्यवस्था भी जरूरी होगी.
आज की तैयारी, भविष्य के मौसम के हिसाब से
नाले, ड्रेनेज सिस्टम और रिजर्वायर को भविष्य की तेज बारिश को ध्यान में रखकर बनाना होगा. इनमें 15-20 फीसदी ज्यादा तेज बारिश संभालने की क्षमता और आगे उसे बढ़ाने की गुंजाइश रखी जा सकती है. किसान को जल्द बेहतर मौसम की जानकारी मिल सकती है, लेकिन इंजीनियर और प्लानर को आज से तैयारी करनी होगी और भविष्य के बदलाव के लिए जगह भी रखनी होगी.
संबंधित खबरें
जिंदगी के लिए पृथ्वी के अलावा साइंटिस्ट्स को क्यों है बेहतर ग्रह की उम्मीद?
2 days ago11 अक्टूबर को धरती से टकरा सकता जबरदस्त सौर तूफान, भारत पर क्या होगा असर?
6 days agoसुपर-डुपर अल नीनो मजबूत, धरती के बड़े हिस्से में बढ़ेगी गर्मी
8 days agoफ्रांसिस हैल्जेन ने जीता फिजिक्स का नोबेल प्राइज 2026
10 days ago'ऑप्टोजेनेटिक्स' पर काम करने वाले 3 साइंटिस्ट्स को मेडिसिन में नोबेल प्राइज
11 days agoखतरे में है कैलिफोर्निया! प्रशांत महासागर में पनप रहा है El Nino
14 days agoSpaceX का रॉकेट Starship लॉन्च, वहां जाने का इरादा जहां कोई इंसान न गया हो
18 days agoअंतरिक्ष में मिल गया जीवन? करोड़ों किमी दूर एक ग्रह से आ रहे रेडियो सिग्नल
20 days agoचक्रवात का कैसे पड़ा नाम 'अर्नब', क्या मचाने वाला है कोहराम?
24 days agoSunita Williams: 'पृथ्वी पर किस चीज को हम लेते हैं फॉर ग्रांटेड, जो स्पेस में नहीं?'
37 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines