Red Kalawa Benefits: कलावा, जिसे मौली भी कहते हैं, हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के अवसर कलाई पर बांधा जाता है. शास्त्रों इसे ‘रक्षा सूत्र’ यानी रक्षा करने वाला धागा कहा गया है. प्रायः यह लाल, पीला, केसरिया, नीला, हरा और काले रंगों का होता है. इसमें लाल कलावा को बेहद शुभ और असरदार माना गया है. आइए जानते हैं, लाल कलावा कब पहनना चाहिए, इसे धारण करने के नियम और फायदे क्या हैं?
लाल कलावा का महत्व
ज्योतिष और हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, लाल कलावा का संबंध मंगल ग्रह और हनुमान जी है. मान्यता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है. ज्योतिष शास्त्र में जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होते हैं, उन्हें लाल कलावा धारण करने की सलाह दी जाती है.
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लाल कलावा कब पहनें?
ज्योतिष परंपरा के अनुसार, लाल कलावा पहनने का सबसे शुभ दिन मंगलवार और शनिवार माना गया है. लेकिन इसे किसी भी शुभ मुहूर्त, पूजा-पाठ और त्योहार के शुभ अवसर पर धारण कर सकते हैं. इसे पहनने का सबसे शुभ समय सुबह माना गया है.
लाल कलावा धारण करने के नियम
शास्त्रों के अनुसार, पुरुष और अविवाहित स्त्रियों को लाल कलावा दाएं हाथ में बांधनी चाहिए, वहीं विवाहित महिलाओं को इसे बाएं हाथ में पहनना चाहिए. कलावा को हाथ पर 3 या 5 बार ही लपेटना चाहिए. इसे बंधवाते समय मुट्ठी बंद होनी चाहिए. दूसरा हाथ सिर पर रख लेना चाहिए.
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लाल कलावा पहनने के फायदे
लाल कलावा पहनने करने से कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं:
- लाल कलावा को कलाई पर बांधने से मंगल ग्रह मजबूत होते हैं. शरीर में ऊर्जा और मन में साहस बढ़ता है.
- इसे धारण करने से भूमि और संपत्ति के काम सफल होते हैं. करियर-कारोबार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं.
- इसे धारण करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश और देवी लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती की कृपा मिलती है.
- इसे पहनने से संकटों में रक्षा होती है. हनुमान जी हर प्रकार की बुरी नजर और तंत्र-मंत्र से बचाते हैं.
- लाल कलावा पहनने से मन शांत रहता है, क्रोध कम आता है या कंट्रोल में रहता है और तनाव दूर होता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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