Parvati Jayanti 2026 Vrat Katha: आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को माता पार्वती की जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. पार्वती जयंती भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती को समर्पित है. माता पार्वती को गौरी, उमा और सती आदि नामों से जाना जाता है. पार्वती जयंती के दिन देवी पार्वती का जन्म हुआ था. आज पार्वती जयंती के दिन उनकी उत्पत्ति से जुड़ी कथा का पाठ अवश्य करें. पार्वती जयंती के दिन इस कथा के पाठ के बिना व्रत और पूजन अधूरा माना जाता है.
पार्वती जयंती की कथा
धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की उत्पत्ति की कहानी पुनर्जन्म से जुड़ी है. माता पार्वती का संबंध देवी सती से माना जाता है. एक बार माता सती ने पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ में प्राणों की आहुति दे दी थी. ऐसा उन्होंने भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण किया था. इसके बाद माता पार्वती के जन्म की कथा पुनर्जन्म से संबंधित है.
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माता सती का पुनर्जन्म
माता सती का जन्म हिमालय राज हिमवान और माता मैना के घर हुआ था. पुनर्जन्म में उनका नाम पार्वती पड़ा. वह बालअवस्था से ही भगवान शिव को अपने पति के रूप में मानती थीं. उन्हें महर्षि नारद मुनि ने बताया कि, शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए उन्हें कठोर तप करना होगा. माता पार्वती ने कई वर्षों तक कठोर तप किया और भगवान शिव को अपनी पति के रूप में प्राप्त किया था. पार्वती जयंती का पर्व अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. पार्वती जयंती को दांपत्य प्रेम और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का दिन मानते हैं. व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन में खुशियों का आगमन होता है.
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पार्वती जयंती का महत्व
माता पार्वती की उत्पत्ति का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. देवी पार्वती को शक्ति और समर्पण की देवी के रूप में पूजा जाता है. पार्वती जयंती का व्रत करने और देवी पार्वती की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है. दांपत्य जीवन में प्रेम, पति की लंबी उम्र, वैवाहिक सुख, योग्य जीवनसाथी पाने के लिए आपको माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.