Mahabharata Story: भारत की भूमि कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा गया था. कुरुक्षेत्र वर्तमान समय में हरियाणा में है. महाभारत के युद्ध को दुनिया का सबसे बड़ा और विनाशकारी धर्मयुद्ध माना जाता है. यह युद्ध धर्म की रक्षा के लिए लड़ा गया था. यह धर्मयुद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए संघर्ष और द्रौपदी के चीरहरण का परिणाम था.

महाभारत के युद्ध में कौरव और पांडव कुरुक्षेत्र के मैदान में उतरे थे. महाभारत के इस युद्ध में देश और दुनिया भर की सेनाओं ने हिस्सा लिया था. यह युद्ध कई दिनों तक चला था. इस युद्ध को लेकर अक्सल लोगों के मन में सवाल आता है कि, यह कितने दिनों चला, कितने लोग मारे गए और कौन इस युद्ध के बाद बचा था. आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

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कितना लंबा चला था महाभारत का युद्ध?

महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र यानी वर्तमान हरियाणा में लड़ा गया था. यह युद्ध 40 किलोमीटर के दायरे में लड़ा गया था. महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था. इस युद्ध में कई महान योद्धा और करोड़ों की संख्या में सेना ने भाग लिया था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह युद्ध 18 दिनों तक चला था. इस युद्ध करोड़ों सैनियों ने भाग लिया था.

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महाभारत युद्ध में कितने योद्धा मारे गए थे?

कुरुक्षेत्र में हुए महाभारत युद्ध में कई योद्धा और सैनिक वीरहति को प्राप्त हुए थे. मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के भीषण युद्ध में 70 लाख सैनिक कौरव पक्ष से और 44 लाख सैनिक पांडव सेना से मारे गए थे. महाभारत युद्ध के दौरान सैनियों का बहुत खून बहा था. ऐसा कहा जाता है कि, इसी वजह से आज भी कुरुक्षेत्र की मिट्टी लाल है. महाभारत युद्ध को लेकर ऐसी मान्यता है कि, इस दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सभी योद्धा स्वर्ग जाते थे. यह धर्म और अधर्म के बीच महासंग्राम था. इसके साक्षी श्रीकृष्ण थे. सभी सैनिक प्राण छूटने के बाद स्वर्ग गए थे.

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महाभारत युद्ध के बाद कितने लोग जीवित बचे थे?

महाभारत युद्ध में लाखों की संख्या में लोग मारे गए थे. 18 दिनों तक चलने वाले इस युद्ध के बाद 18 योद्धा जीवित बचे थे. इनमें से 15 लोग पांडवों की तरफ से और 3 लोग कौरवों के पक्ष से जीवित बचे थे. कौरव पक्ष से बचे हुए लोगों में से एक द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा थे. दूसरे कौरवों के कुल गुरु कृपाचार्य और तीसरे नारायणी सेना के प्रमुख कृतवर्मा जीवित बचे थे.

पांडव पक्ष से 15 लोग बचे थे. इनमें से 5 पांडव भाई युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव जीवित बचे थे. भगवान श्रीकृष्ण, सात्यकि और युयुत्सु जीवित बच गए थे. इन योद्धाओं के अलावा पांडव पक्ष से कई लोग जीवित बचे थे, जो युद्ध क्षेत्र से बाहर या शिविर में सुरक्षित थे. इनमें द्रौपदी, कुंती, धृतराष्ट्र, गांधारी, विदुर, संजय और बलराम शामिल थे. इनमें से श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम युद्ध में भाग न लेकर तीर्थयात्रा पर गए थे.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.