Magh Gupt Navratri 2025: 30 या 31 जनवरी, कब से शुरू है नवरात्रि? जानें तिथि, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Magh Gupt Navratri: साल में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें दो गुप्त, एक चैत्र और एक शारदीय नवरात्रि है। साल 2025 के पहले माह माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो रहा है, जिसकी तिथि को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। चलिए जानते हैं 30 जनवरी या 31 जनवरी, कब से माघ गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है।

Magh Gupt Navratri 2025

Magh Gupt Navratri 2025: सनातन धर्म के लोगों के लिए नवरात्रि के प्रत्येक दिन का खास महत्व है। नवरात्रि का पर्व 9 दिनों तक मनाया जाता है, जिस दौरान माता दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत रखना शुभ माना जाता है। साल में कुल चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें से दो गुप्त, एक चैत्र और एक शारदीय नवरात्रि है। नए साल की शुरुआत माघ गुप्त नवरात्रि के साथ हो रही है। माना जाता है कि जो लोग नियमित रूप से नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करते हैं, उनके जीवन में चल रही परेशानियां काफी कम हो जाती हैं।

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चलिए जानते हैं साल 2025 में किस दिन से माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। साथ ही आपको घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और मां दुर्गा की पूजा विधि के बारे में जानने को मिलेगा।

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2025 में कब से शुरू है माघ गुप्त नवरात्रि?

वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में 30 जनवरी, दिन गुरुवार से माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो रहा है, जिसका समापन 7 फरवरी 2025, दिन शुक्रवार को होगा। 30 जनवरी 2025 को कलश स्थापना भी होगी, जिसका शुभ मुहूर्त सुबह में 9 बजकर 25 मिनट से लेकर 10 बजकर 46 मिनट तक है। 30 जनवरी को कलश स्थापना का एक और मुहूर्त है, जो दोपहर में 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 56 मिनट तक है।

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माघ गुप्त नवरात्रि 2025 का कैलेंडर

  • 30 जनवरी 2025- घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा
  • 31 जनवरी 2025- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 1 फरवरी 2025- मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 2 फरवरी 2025- मां कुष्मांडा की पूजा और मां स्कंदमाता की पूजा
  • 3 फरवरी 2025- मां कात्यायनी की पूजा
  • 4 फरवरी 2025- मां कालरात्रि की पूजा
  • 5 फरवरी 2025- दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी की पूजा और संधि पूजा
  • 6 फरवरी 2025- मां सिद्धिदात्री की पूजा
  • 7 फरवरी 2025- नवरात्रि का पारण

गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि  

  • नवरात्रि में नियमित रूप से ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • स्नान आदि कार्य करने के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में एक चौकी रखें। उसके ऊपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।
  • मां के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • माता रानी को फल, फूल, सिंदूर, मिठाई और अक्षत अर्पित करें। इस दौरान दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करके पूजा का समापन करें।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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