Kundali Pitru Dosha: अगर आपकी पूरी मेहनत के बाद भी काम बार-बार अटक जाते हैं, नौकरी में ग्रोथ नहीं मिल रही, बिजनेस में फायदा नहीं हो रहा, शादी की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है या फिर संतान सुख को लेकर चिंता बनी हुई है और अगर ऐसा लंबे समय से हो रहा है, तो वैदिक ज्योतिष में इसे कई बार पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि जब पूर्वज किसी वजह से संतुष्ट नहीं होते या उनके प्रति जरूरी धार्मिक कर्तव्य पूरे नहीं किए जाते, तो उसका असर कुंडली में पितृ दोष के रूप में दिखाई दे सकता है. यही वजह है कि कई लोग समय रहते इसकी पहचान और उपाय जानना चाहते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पितृ दोष क्या है, इसके संकेत क्या हैं और इससे जुड़े कौन-कौन से पारंपरिक उपाय बताए गए हैं?
पितृ दोष की पहचान क्या है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, अगर कुंडली के पहले, चौथे, नवें या दसवें भाव में सूर्य के साथ राहु या केतु बैठ जाएं, तो पितृ दोष बनने की संभावन. मानी जाती है. खासकर नवां भाव पूर्वजों और पिता का माना जाता है. अगर यहां राहु, केतु या कमजोर सूर्य हो, तो इस दोष का असर ज्यादा माना जाता है. पंचम भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव संतान से जुड़ी परेशानियां बढ़ा सकता है. वहीं लग्न या चंद्रमा पर राहु या शनि का असर मानसिक तनाव और बेचैनी का कारण माना जाता है.
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प्रैक्टिकल लाइफ में कैसे पहचानें?
अगर काफी समय से मेहनत का रिजल्ट नहीं मिल रहा. शादी में लगातार देरी हो रही है. पति-पत्नी के बीच बिना वजह तनाव बना रहता है. संतान सुख में रुकावट आ रही है. पैसों की तंगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही. घर के लोग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं. सपने में पूर्वज दुखी या परेशान नजर आते हैं. बिना बात गुस्सा आता है. नींद ठीक से नहीं आती. घर का माहौल हमेशा तनाव वाला रहता है. तो ज्योतिष में इन्हें पितृ दोष के संभावित संकेत माना जाता है. हालांकि इन परेशानियों के पीछे दूसरे कारण भी हो सकते हैं.
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पितृ दोष मुक्ति के लिए क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष या अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना जाता है. ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा है. पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं. शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं. शिव मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या रुद्राभिषेक कराएं. जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और काले तिल का दान करें. गाय को हरी घास खिलाएं. कौवों को भोजन देना भी शुभ माना जाता है. ये सभी उपाय धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं.
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श्रद्धा सबसे जरूरी
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सिर्फ उपाय करना ही काफी नहीं होता. उन्हें पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ करना भी जरूरी है. साथ ही अपऔर पूर्वजों का सम्मान करें. परिवार की अच्छी परंपराओं को आगे बढ़ाएं. जरूरतमंदों की मदद करें. ऐसे संस्कार भी पितरों की कृपा पाने का महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.