Hariyali Teej 2026: हर साल सावन महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया को हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है. इस बार हरियाली तीज 15 अगस्त को है. यह दिन सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए बहुत ही खास होता है. हरियाली तीज के व्रत पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का महत्व होता है. यह व्रत करने से पति की लंबी उम्र की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन की इच्छा पूर्ण होती है.
हरियाली तीज शुभ मुहूर्त (Hariyali Teej Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त - 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 04:45 ए एम से 05:50 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 11:59 ए एम से 12:52 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:37 पी एम से 03:30 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 07:01 पी एम से 07:22 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 07:01 पी एम से 08:06 पी एम
अमृत काल - 08:18 पी एम से 09:53 पी एम
निशिता मुहूर्त - 12:04 ए एम से 12:47 ए एम, 16 अगस्त
रवि योग - 05:50 ए एम से 03:25 ए एम, 16 अगस्त
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हरियाली तीज पूजा विधि (Hariyali Teej Puja Vidhi)
हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए करती हैं. यह व्रत निर्जला रखा जाता है. हरियाली तीज व्रक को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. हरियाली तीज के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर हरे रंग के कपड़े पहनें. घर के मंदिर की सफाई कर लकड़ी की चौकी स्थापित करें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. आप शिव परिवार की प्रतिमा भी स्थापित कर सकती हैं.
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भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. भगवान शिव को पंचामृत चढ़ाएं. माता पार्वती और शिव जी को मालपुआ, पूड़ी-सब्जी, खीर, घेवर, आदि फल और मिठाई का भोग लगाएं. हरियाली तीज की कथा का पाठ करें. इसके साथ ही आरती कर पूजा संपन्न करें. हरियाली तीज व्रत के दौरान दिन में सोने, किसी से विवाद करने और अपशब्द कहने से बचें. इन नियमों का ध्यान रखें.
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सुखी वैवाहिक जीवन के उपाय
पति-पत्नी के रिश्ते में चल रहे तनाव को दूर करने और मधुर संबंध के लिए आप कई उपायों को कर सकते हैं. इसके लिए आप लौंग और कपूर से उपाय कर सकते हैं. आप कपूर का टुकड़ा लें और इसके साथ ही 7 साबुत लौंग लें. लौंग और कपूर को हाथ में लेकर माता पार्वती और भगवान शिव से सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें. ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. इसके बाद लौंग और कपूर को माता पार्वती और शिव जी की प्रतिमा के समक्ष रखकर जलाएं. सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री को मंदिर में दान करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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