Shukra Pradosh Vrat 2026: आज है सौभाग्य और सुखमय जीवन देने वाला शुक्र प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Shukra Pradosh Vrat 2026: आज 16 जनवरी 2026 को साल का पहला शुक्र प्रदोष व्रत है. भगवान शिव की पूजा का यह व्रत जीवन में सौभाग्य और खुशहाली लाने का अवसर माना जाता है. आइए जानते हैं कि शुक्र प्रदोष व्रत क्या होता है, इसे करने के क्या लाभ हैं और आज शिव पूजा का शुभ मुहूर्त कब है?

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Shukra Pradosh Vrat 2026: आज 16 जनवरी 2026 को साल का पहला शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत है, जो शुक्रवार के दिन पड़ रहा है. हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष पूजा के रूप में मनाया जाता है, जो चन्द्र मास की त्रयोदशी तिथि में किया जाता है. पंचांग के अनुसार, प्रदोष का काल (समय) सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और यह समय शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है. आइए जानते हैं, शुक्र प्रदोष व्रत क्या है, यह व्रत रखने के क्या लाभ हैं और आज शिव पूजा करने शुभ मुहूर्त कब है?

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शुक्र प्रदोष व्रत क्या है

जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को आती है, तब इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. इस दिन व्रत करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और घर में समृद्धि और शांति आती है. विशेष रूप से स्त्रियों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है. शुक्र ग्रह की कृपा पाने के लिए यह व्रत अत्यधिक फायदेमंद माना गया है. आपको बता दें, शिव पूजा के साथ इस दिन देवी लक्ष्मी की भी आराधना की जाती है. माना जाता है कि नियमपूर्वक व्रत करने से धन, वैभव और प्रेम जीवन में वृद्धि होती है.

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शुक्र प्रदोष व्रत के लाभ

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव सभी ग्रहों के अधिपति हैं. शुक्र प्रदोष व्रत करने से शुक्र ग्रह की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है. गृहस्थ जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने के लिए यह व्रत विशेष रूप से कारगर है.

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पूजा का शुभ मुहूर्त

आज माघ मास की त्रयोदशी तिथी है. आज इस व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 5:47 पीएम से 8:29 पीएम तक है. इस प्रकार पूजा की कुल अवधि लगभग 2 घंटे 42 मिनट है. कहा जाता है कि इस समय में पूजा करने से भगवान शिव अति-प्रसन्न होते हैं और विशेष फल प्राप्त होते हैं.

प्रदोष व्रत पूजा विधि

– सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का व्रत रखने का संकल्प लें.
– दिनभर निर्जला रह सकते हैं, या फल-हार (फलाहार) कर सकते हैं.
– शाम को फिर से स्नान करें, पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. शिव परिवार की मूर्ति या चित्र स्थापित करें,.
– कुश (दर्भ) का आसन लें और पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें.
– एक घी का दीपक जलाएं, और आठ दिशाओं में भी दीपक जलाएं.
– शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से अभिषेक करें.
– बेलपत्र, सफेद फूल (जैसे धतूरा, आक), चावल, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची चढ़ाएं.
– “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें (108 बार).
– प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें. शिव चालीसा और अंत में आरती करें.
– घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू या मौसमी फल का भोग लगाएं.
– पूजा के बाद भोग को परिवार और दोस्तों में बांटें.
– अगले दिन, शिवजी की पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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