Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य अपनी बुद्धिमत्ता और समझदारी के लिए जाने जाते हैं. वह अपने विचारों से लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं. चाणक्य नीति के श्लोक के जरिए व्यक्ति अपने जीवन से जुड़ी बातों के बारे में जान सकता है. चाणक्य नीति के श्लोक के अनुसार, व्यक्ति अपने और पराए लोगों की पहचान कर सकता है. आज के समय में सभी लोग दिखावे के लिए शुभचिंतक बनते हैं. ऐसे में अपने और पराए की पहचान करना बहुत ही जरूरी होता है.
चाणक्य नीति का श्लोक
उत्सवें व्यसनें चैव दुर्भिक्षे राष्ट्रविप्लवे।
राजद्वारे श्मशाने च यः तिष्ठति स बान्धवः॥
आचार्य चाणक्य के इस श्लोक में बताया गया है कि, बीमारी, आर्थिक तंगी, कानूनी झंझट, दुख की घड़ी और किसी संबंधी की मौत पर श्मशान में जो आपके साथ होता है वह आपका अपना होता है. इस प्रकार का व्यक्ति आपका सच्चा बंधु है. आइये इनके बारे में जानते हैं.
बीमारी में साथ – आपके बीमार होने पर जो साथ रहता है और मुश्किल समय में आपकी मदद करता है. वह सच्चा मित्र और संबंधी होता है. बीमारी के समय निस्वार्थ भाव से आपकी सेवा करने वाले लोग हमेशा आपका साथ देते हैं.
कंगाली में साथ – अगर किसी व्यक्ति की जमा पूंजी समाप्त हो जाती है और कंगाली आ जाती है. ऐसे में उसका साथ ना छोड़ने वाला ही सगा होता है. तंगी के समय में मदद के लिए हाथ बढ़ाने वाला सच्चा मित्र होता है.
कानूनी मामलों में साथ – कोर्ट कचहरी के कानूनी मामलों में कोई आपका साथ देता है तो, वह आपका अपना है. अक्सर ऐसी मुश्किल घड़ी में लोग साथ छोड़कर भाग जाते हैं. कोर्ट कचहरी के मामले में फंसने से लोग डरते हैं. आप ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर सकते हैं.
श्मशान में साथ – घर-परिवार में किसी की मृत्यु होने पर दुख के समय में साथ होने वाला व्यक्ति अपना होता है. ऐसे लोग सुख दुख के सच्चे साथी होते हैं. परिवार में दुख और किसी श्मशान यात्रा के समय साथ होने वाले व्यक्ति पर भरोसा कर सकते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी चाणक्य नीति और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.