Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी के दिन भूलकर भी न करें ये 10 काम, लगता है पाप

Ahoi Ashtami 2025: संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन के लिए हर साल संतानवती महिलाएं अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं. हालांकि, व्रत के दौरान कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, नहीं तो पाप लगता है. आइए जानते हैं अहोई अष्टमी के दिन संतानवती महिलाओं को कौन-से 10 कामों को करने से पाप लग सकता है.

Ahoi Ashtami 2025

Credit- Social Media

Ahoi Ashtami 2025: हिंदू धर्म की संतानवती महिलाओं के लिए अहोई अष्टमी के व्रत का खास महत्व है. ये व्रत माताएं अपने बेटे की लंबी आयु, खुशहाल जीवन, तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं. हालांकि, बदलते दौर में माताएं अपनी पुत्रियों के लिए भी ये व्रत रखती हैं. खासकर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा के कुछ शहरों में अहोई अष्टमी के व्रत को रखने की परंपरा है.

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द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है, जिसे अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है. इस बार 13 अक्टूबर 2025, वार सोमवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा. आइए अब जानते हैं अहोई अष्टमी के दिन महिलाओं को किन 10 कामों को करने से पाप लग सकता है.

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अहोई अष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

  • अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला होता है यानी दिनभर न तो कुछ खाना होता है और न ही जल पीना चाहिए.
  • व्रत के दौरान महिलाओं को नुकीली और धारधार वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • अहोई अष्टमी के दिन मिट्टी से जुड़ा कोई काम नहीं करना चाहिए.
  • व्रत के दौरान सोना अशुभ माना जाता है.
  • यदि आपने एक बार व्रत का संकल्प ले लिया है तो उसे बीच में न तोड़ें.
  • व्रत के दौरान न तो झूठ बोलें और न ही किसी से झगड़ा करें.
  • अष्टमी तिथि के आरंभ से लेकर समापन तक ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  • व्रत के दौरान ज्यादा बातचीत न करें, बल्कि मंत्र जाप करें.
  • अष्टमी तिथि के आरंभ से लेकर समापन तक बिस्तर पर न बैठें. हालांकि, भूमि पर दरी डालकर उस पर विश्राम कर सकती हैं.
  • अहोई अष्टमी के दिन बाल धोना और काटना दोनों वर्जित होता है.

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अहोई अष्टमी की पूजा विधि

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद लाल रंग के कपड़े धारण करें.
  • हाथ में जल लेकर निर्जला व्रत का संकल्प लें.
  • घर के मंदिर में अहोई माता का चित्र या तस्वीर स्थापित करें.
  • माता को रोली, फल, फूल, अक्षत, पूड़ी, हलवा, चने और मीठे गुलगुले अर्पित करें.
  • देसी घी का एक दीपक जलाएं.
  • अहोई व्रत की कथा सुनें या पढ़ें.
  • आरती करें.
  • रात को तारों और चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करके पानी पीकर व्रत का पारण करें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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