दुनिया के टॉप 10 देश, जिनके पास है सबसे ज्यादा तेल, चौंका देगा लिस्ट में पहला नाम
दुनिया में तेल भंडार को लेकर कौन से देश सबसे आगे हैं? टॉप 10 देशों की इस सूची में शामिल नाम और आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं.

वेनेजुएला वो देश है जिसके पास दुनिया का सबसे ज्यादा प्रूवन तेल रिजर्व है जो करीब 303 बिलियन बैरल माना जाता है. इसका ज्यादातर तेल ओरिनोको बेल्ट में मौजूद एक्स्ट्रा हैवी क्रूड है जिसे निकालना आसान नहीं लेकिन मात्रा बेहद ज्यादा है.
2. सऊदी अरब
2 / 10सऊदी अरब के पास करीब 269 बिलियन बैरल का तेल रिजर्व है और यही वजह है कि उसका नाम हमेशा टॉप देशों में आता है. यहां का तेल निकालना आसान है और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने से यह दुनिया का भरोसेमंद सप्लायर बना हुआ है.
3. ईरान
3 / 10ईरान के पास करीब 209 बिलियन बैरल का तेल रिजर्व है और यह मिडिल ईस्ट का अहम प्लेयर है. अच्छी क्वालिटी के बावजूद अमेरिका के प्रतिबंध और राजनीतिक तनाव इसकी असली ताकत को सामने नहीं आने देते.
4. कनाडा
4 / 10कनाडा के पास 163 से 170 बिलियन बैरल का तेल है जो ज्यादातर अल्बर्टा के ऑयल सैंड्स में मिलता है. तेल निकालने की लागत ज्यादा होने के बाद भी यह अमेरिका के लिए एक स्थिर सप्लायर बना हुआ है.
5. इराक
5 / 10इराक के पास करीब 145 बिलियन बैरल का तेल रिजर्व है और यह ओपेक का अहम सदस्य है. राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर ढांचा इसकी पूरी क्षमता के इस्तेमाल में सबसे बड़ी बाधा है.
6. रूस
6 / 10रूस के तेल रिजर्व 80 से 107 बिलियन बैरल के बीच माने जाते हैं और यहां मिक्स क्वालिटी का क्रूड मिलता है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत और चीन को अपना बड़ा बाजार बना लिया है.
7. कुवैत
7 / 10कुवैत के पास करीब 101 बिलियन बैरल का हाई क्वालिटी तेल रिजर्व है जो इसे खास बनाता है. ओपेक का यह देश लंबे समय से दुनिया को स्थिर सप्लाई देता आ रहा है.
8. यूएई
8 / 10यूएई के पास 97 से 111 बिलियन बैरल का तेल रिजर्व है जिसका बड़ा हिस्सा अबू धाबी में है. तेल पर निर्भरता के साथ साथ देश रिन्यूएबल एनर्जी में भी तेजी से निवेश कर रहा है.
9. अमेरिका
9 / 10अमेरिका के पास 45 से 69 बिलियन बैरल का तेल रिजर्व है जो बाकी देशों से कम है. शेल ऑयल तकनीक ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बना दिया है.
10. लीबिया
10 / 10लीबिया के पास करीब 48 बिलियन बैरल का तेल है जो अफ्रीका में सबसे ज्यादा है. गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से यहां तेल उत्पादन लगातार प्रभावित होता रहता है.