195KM भयंकर स्पीड वाले चक्रवाती तूफान की दस्तक, 3 देशों में तबाही मचाने को तैयार, कितना खतरनाक है साइक्लोन Maila?
प्रशांत महासागर में भयंकर और विनाशकारी चक्रवाती तूफान उठा है, जो समुद्र तटों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने तूफान के असर से भारी बारिश होने, भीषण तूफानी हवाएं चलनें और बाढ़ आने का रेड अलर्ट जारी किया है। आइए जानते हैं कि चक्रवाती तूफान कहां-कहां तबाही मचा सकता है और यह कितना खतरनाक है?

प्रशांत महासागर में उठे चक्रवाती तूफान का नाम ‘मैला’, जो कैटेगरी-4 का तूफान गया है और 195 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से पश्चिम की और बढ़ रहा है। क्योंकि भारत प्रशांत महासागर से बहुत दूर है, इसलिए देश पर इस तूफान का असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह तूफान काफी शक्तिशाली और मजबूत है।
सोलोमन द्वीप में तबाही मचा रहा तूफान
2 / 5बता दें कि चक्रवाती तूफान मैला 10 अप्रैल 2026 की सुबह प्रशांत महासागर में ही सोलोमन द्वीप के ऊपर मंडरा रहा है, जहां भारी बारिश हो रही है और तूफानी हवाएं चल रही हैं। समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने के कारण द्वीप के समुद्र तटीय इलाके बाढ़ के पानी में डूबे हुए है। लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं।
अगले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया से टकराएगा तूफान
3 / 5ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो के अनुसार, चक्रवाती तूफान मैला अगले सप्ताह की शुरुआत में नॉर्थ क्वींसलैंड के समुद्र तटीय इलाकों से टकरा सकता है। इसी तट पर गत 20 मार्च को कैटेगरी-4 के चक्रवाती तूफान नारेले ने भी तबाही मचाई थी। ऑस्ट्रेलिया के साथ न्यूजीलैंड में भी चक्रवाती तूफान का असर दिख सकता है।
तूफान से क्वींसलैंड में तबाही मचने का खतरा
4 / 5ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञान ब्यूरो के अनुसार, इस सप्ताह के आखिर में चक्रवाती तूफान मैला कोरल तट के ऊपर से होकर गुजरेगा और फिर रविवार की रात को नॉर्थ क्वीनसलैंड के करीब पहुंचेगा। यहां समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठ सकती हैं और तूफानी हवाएं चल सकती हैं। वहीं भारी बारिश के साथ भूस्खलन होने का खतरा भी रहेगा। बिजली सप्लाई भी बाधित हो सकती है।
तूफान की दस्तक से क्वींसलैंड में रेड अलर्ट
5 / 5ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नॉर्थ क्वीनसलैंड के लोगों को अलर्ट किया है कि वे अपने घरों में रहें। ड्राइविंग करने और समुद्र तटों पर जाने से बचें। इमरजेंसी किट तैयार रखें और सतर्क रहें। प्रशासन और पुलिस के संपर्क में रहें, ताकि अगर शिफ्ट करना पड़ा तो बचाव दल के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो। किसी भी तरह की आपात स्थिति में नजदीकी रेस्क्यू सेंटर में संपर्क करें।