35 साल पहले क्यों हिमाचल पर्वत पर गिरी थी बर्फ और Black Rain, अब ईरान में हो रही है 'काली बारिश', जानिए कितनी खतरनाक?
Iran Israel War: इजरायल-ईरान युद्ध के बीच तेल डिपो पर हमलों के बाद ईरान में ‘ब्लैक रेन’ यानी काली बारिश देखने को मिली है. ये जहरीली बारिश इंसानों की सेहत, पर्यावरण और जलवायु के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है.

युद्ध और तेल डिपो पर हमले
2 / 11इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान ईरान के कई तेल डिपो, रिफाइनरी और स्टोरेज टैंक को निशाना बनाया गया. इन हमलों के बाद भीषण आग लग गई, जो कई घंटों तक जलती रही. इस आग से आसमान में काले धुएं के बड़े-बड़े बादल छा गए, जिसने पूरे इलाके की हवा को जहरीला बना दिया.
‘ब्लैक रेन’ क्या होती है?
3 / 11ब्लैक रेन (काली बारिश) एक असामान्य घटना है, जिसमें बारिश का पानी ट्रांसपेरेंट न होकर काला या गहरा रंग लिए होता है. ये तब होता है जब हवा में मौजूद धुआं, राख, कार्बन और जहरीले केमिकल बारिश के पानी के साथ मिल जाते हैं.
ब्लैक रेन बनने की पूरी प्रक्रिया
4 / 11तेल डिपो में आग लगने से भारी मात्रा में कार्बन, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और बाकी जहरीले कण हवा में फैल जाते हैं. ये कण बादलों में जाकर पानी की बूंदों से चिपक जाते हैं. जब बारिश होती है, तो यही कण पानी के साथ नीचे गिरते हैं और बारिश का रंग काला हो जाता है.
इसमें कौन-कौन से जहरीले तत्व होते हैं?
5 / 11इंसानों की सेहत पर असर
6 / 11हवा की गुणवत्ता पर असर
7 / 11तेल आग से निकलने वाला धुआं हवा में महीनों तक बना रह सकता है. इससे Air Quality Index (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों को सांस की बीमारियां हो सकती हैं.
पर्यावरण पर लंबे वक्त तक असर
8 / 11समुद्री जीवन भी खतरे में
9 / 11तेल और केमिकल्स जब बारिश के जरिए नदियों और समुद्र में पहुंचते हैं, तो समुद्री जीवों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं. मछलियां, कोरल और बाकी समुद्री जीव जहरीले पानी के कारण मर सकते हैं या बीमार हो सकते हैं. तेल डिपो में लगी आग से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और ब्लैक कार्बन निकलता है. ये गैसें ग्लोबल वार्मिंग को तेज करती हैं और पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने में योगदान देती हैं.
गल्फ वॉर है बड़ा उदाहरण
10 / 111991 के गल्फ वॉर के दौरान भी कुवैत के तेल कुओं में आग लगाई गई थी. उस समय महीनों तक काला धुआं छाया रहा और “ब्लैक रेन” जैसी घटनाएं हुईं. उस घटना को आज भी दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय नुकसान में गिना जाता है.
बचाव के उपाय
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