दुनिया के वो 22 देश जिनके पास आर्मी नहीं फिर भी हैं सुरक्षित, जानें कौन करता है इनकी सिक्योरिटी?

Countries Without Army: दुनिया में सबसे शक्तिशाली सेना चीन की है। उसके बाद अमेरिका, जापान, रूस और अन्य देशों की सेना है। हर देश की सुरक्षा का जिम्मा सेना के हाथ में ही होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जिनके पास अपनी सेना नहीं है। न आर्मी है, न वायुसेना और न नौसेना है, फिर भी वे सुरक्षित हैं, कैसे आइए जानते हैं...

Military Security
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दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में से 22 देश ऐसे हैं, जो स्वतंत्र हैं, लेकिन इनकी अपनी कोई आर्मी नहीं है, यानी ये देश बिना आर्मी के भी सुरक्षित हैं। इनमें से कई देशों ने तो युद्ध के खिलाफ नीति के चलते अपनी सेना खत्म ही कर दी और कुछ देशों ने तो सेना का गठन किया ही नहीं है।

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दुनिया के 6 देशों ने सेना खत्म कर दी

दुनिया के 6 देशों ने सेना खत्म कर दी2 / 5

लिकटेंस्टाइन ने 1868 में अपनी सेना खत्म कर दी थी और अब जरूरत पड़ने पर स्विटजरलैंड और ऑस्ट्रिया इन्हें सैन्य सहयोग करते हैं। पनामा ने 1990 से 1994 के बीच अपनी सेना खत्म कर दी थी और अब पैरमिलिट्री स्पेशल यूनिट देश की सुरक्षा करती है। मॉरिशियस ने 1968 में अपनी सेना डिसॉल्व कर दी थी और अब इसके पास पैरामिलिट्री फोर्स है। वहीं भारत जरूरत पड़ने पर इसे सिक्योरिटी देता है। ग्रेनाडा ने 1983 में और डोमिनका ने 1981 में अपनी सेना भंग कर दी थी और अब जरूरत पड़ने पर कैरेबियन रीजनल सिक्योरिटी सिस्टम इन दोनों देशों की सुरक्षा करता है।

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इन देशों की सुरक्षा अमेरिका के हाथ में

इन देशों की सुरक्षा अमेरिका के हाथ में3 / 5

कोस्टा रिका ने 1948 में अपनी सेना खत्म कर दी थी और अब अमेरिका एवं कोलंबिया से ट्रेंड स्पेशल पुलिस यूनिट इसकी सुरक्षा करती है। वानुआतु की सुरक्षा पैरामिलिट्री फोर्स करती है। ऑस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस, न्यूजीलैंड और अमेरिका इस देश के सैन्य सहयोगी हैं। सोलोमन आइलैंड में केवल पुलिस है, जिसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पुलिस ट्रेनिंग देती है। तुवालु के पास सेना नहीं है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया इसका सैन्य सहयोगी है। पलाऊ के पास भी कभी सेना नहीं थी, लेकिन इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी 2044 तक अमेरिका के पास है।

वेटिकन सिटी की सुरक्षा इटली सेना करती

वेटिकन सिटी की सुरक्षा इटली सेना करती4 / 5

माइक्रोनेशिया कई छोटे-छोटे द्वीपों का देश है और इसकी सैन्य सुरक्षा अमेरिका के पास है। सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनाडाइंस की सुरक्षा कैरेबियन रीजनल सिक्योरिटी सिस्टम करता है। वेटिकन सिटी दुनिया का सबसे छोटा देश है और इसे इंटरनल सिक्योरिटी स्विटजरलैंड पुलिस प्रदान करती है। वहीं रोम से घिरे होने के चलते इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी इटली की है। सैमोआ दक्षिण प्रशांत महासागर में 1962 में न्यूजीलैंड से आजाद हुआ देश है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी न्यूजीलैंड की ही है।

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NATO भी करता है एक देश की सुरक्षा

NATO भी करता है एक देश की सुरक्षा5 / 5

आइसलैंड NATO का इकलौता सदस्य देश है, जिसकी अपनी सेना नहीं, इसलिए इसकी सुरक्षा NATO करती है। सैन मरीनो दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश है और चारों तरफ से इटली से घिरा होने के कारण इसकी सुरक्षा इटली की जिम्मेदारी है। यूरोप के सबसे छोटे देशो में से एक अंडोरा फ्रांस और स्पेन के बीच बसा है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दोनों देश निभाते हैं। दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश मोनैको है और इसकी सुरक्षा की फ्रांस करता है। दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश नाऊरो है और इसकी सुरक्षा ऑस्ट्रेलिया करता है। 1986 में आज़ाद हुए मार्शल आइलैंड्स की अपनी सेना नहीं है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका के पास है। किरिबाती दुनिया का पहला गिलबर्ट आइलैंड है, जिसकी सुरक्षा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड मिलकर करते हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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