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क्या आप जानते हैं कि आज से करीब 400 साल पहले भारत पर शासन करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी आज किस हाल में है, उसका मालिक आज कौन है और वह अब क्या काम कर रही है? इतिहास में बड़ा नाम कमाने वाली यह कंपनी आज कहां है, इसके बारे में शायद ही कोई जानता होगा. इस स्टोरी में हम आपको अंग्रेजों की शान माने जाने वाली कंपनी की आज क्या हालत हो चुकी है उसके बारे में बताएंगे.

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ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को इंग्लैंड में हुई थी. शुरुआत में यह एक व्यापारिक कंपनी थी, जिसका मकसद एशिया और यूरोप के बीच कारोबार करना था. लेकिन धीरे-धीरे यह सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रही, बल्कि सत्ता की ताकत भी हासिल करने लगी.

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कंपनी भारत से कपास, रेशम, मसाले, नील और साल्टपीटर का व्यापार करती थी, वहीं चीन से चाय का बड़ा कारोबार किया जाता था. समय के साथ कंपनी ने व्यापार पर एकाधिकार जमा लिया और अपनी निजी सेना के दम पर भारत के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था.

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1857 के विद्रोह ने कंपनी की नींव हिला दी इसके बाद 1858 में ब्रिटिश सरकार ने भारत की सत्ता अपने हाथ में ले ली. आखिर में 1874 में ईस्ट इंडिया कंपनी को आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया गया था और यह नाम इतिहास की किताबों तक सीमित हो गया.

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करीब एक सदी बाद, भारतीय मूल के ब्रिटिश कारोबारी संजीव मेहता ने 2003 से 2005 के बीच इस ऐतिहासिक नाम के अधिकार खरीद लिए. नाम खरीदने के उन्होंने बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को एक लग्जरी रिटेल ब्रांड के रूप में दोबारा शुरू किया. इसका मुख्य स्टोर लंदन के मेफेयर इलाके में खोला गया.

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नई कंपनी कोई शासन नहीं चला रही थी. यह एक प्रीमियम ब्रांड थी, जो महंगी चाय, कॉफी, चॉकलेट, मसाले और गिफ्ट हैम्पर बेचती थी. कंपनी ने अपने ऐतिहासिक नाम को लग्जरी पहचान के साथ पेश किया, जिससे इसे खास ब्रांड इमेज मिली.

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रिपोर्ट्स के अनुसार, आधुनिक कंपनी को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा. साथ ही, उस पर कर्ज बढ़ने लगा और टैक्स व कर्मचारियों के भुगतान में देरी होने लगी. बाजार में बढ़ता मुकाबला और कम बिक्री ने भी कंपनी की हालत कमजोर कर दी, जिससे कंपनी का काम बहुत खराब हो गया.

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कंपनी की बुरी हालात के कारण साल 2025 में कंपनी आधिकारिक रूप से लिक्विडेशन में चली गई, यानी उसकी संपत्तियां बेचकर कर्ज चुकाने की प्रक्रिया शुरू हुई और यह कंपनी फिर बंद हो गई. यह दूसरी बार है जब ईस्ट इंडिया कंपनी नाम की संस्था खत्म हुई.