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साल 2025 में संसद के 2 बड़े सत्र मानसून सेशन और विंटर सेशन लगे, जिनमें कई अहम बिल पास हुए. वहीं इस साल सरकार ने नए लेबर कोड और GST स्लैब में बदलाव करके देश की अर्थव्यवस्था के साथ आम लोगों की जिंदगी को भी बदला. हालांकि कई बिलों को लेकर विपक्ष ने बवाल भी काटा, बावजूद इसके बिल पास हुए और राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाकर कानून बनाया गया.

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अप्रैल 2025 में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराकर राष्ट्रपति की मंजूरी से लागू किया गया. 8 अप्रैल 2025 से यह कानून देश में लागू है, जो वक्फ अधिनियम 1995 का संशोधित रूप है. इसका नया नाम यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट 1995 (UMEED एक्ट) है. इस संशोधित कानून का मुख्य मकसद वक्फ बोर्ड की वर्किंग में पारदर्शिता लाना है. वक्फ बोर्ड के मिसमैनेजमेंट और अतिक्रमण को रोकना है. महिलाओं एवं पिछड़े मुस्लिम समुदायों का सशक्तिकरण करना तथा वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड मेंटेन करना है.

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21 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए आयकर अधिनियम 2025 को मंजूरी दी, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएगा. इस नए कानून ने 1961 के पुराने कानून की जगह ली है. नए कानून के तहत कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, बल्कि आयकर कानून की भाषा को सरल करके आम लोगों के समझने योग्य बनाया गया है. पुराने अधिनियम में 800 से ज्यादा धाराएं थीं, वहीं नए कानून में 536 धाराएं, 23 अध्याय और 16 अनुसूचियां हैं. पुराने कानून में आयकर के लिए मूल्यांकन वर्ष (Assessment Year) और पूर्ववर्ती वर्ष (Previous Year) टर्म का जिक्र था, वहीं नए कानून में इनकी जगह पर 'कर वर्ष' (Tax Year) का इस्तेमाल किया गया है.

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साल 2025 में सबसे बड़ा बदलाव GST काउंसिल ने किया. परिषद की 56वीं बैठक में अगली पीढ़ी के GST सुधारों को मंजूरी दी गई, जिसके तहत GST की 4 स्लैब वाला सिस्टम खत्म करके सिर्फ 2 स्लैब वाला सिस्टम लागू किया गया. अब GST की सिर्फ 2 स्लैब 5 और 18 प्रतिशत रह गई हैं. 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने GST सुधारों की घोषणा की थी थी. काउंसिल ने 3 सितंबर को इन्हें मंजूरी मिली और 22 सितंबर से ये प्रभावी हो गए.

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साल 2025 में केंद्र सरकार ने 4 श्रम संहिताएं लागू करके बड़ा सुधार किया. 21 नवंबर 2025 से वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और कार्यस्थल सुरक्षा संहिता लागू हैं. इन 4 नए लेबर कोड को 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर सरल और आधुनिक लेबर कोड बनाया गया है, जिससे मजदूरों का कल्याण होगा और उद्योगों को मजबूती मिलने की उम्मीद है. न्यूनतम वेतन और समय पर सैलरी, नियुक्ति पत्र अनिवार्य, कार्य घंटे और ओवरटाइम, सैलरी स्ट्रक्चर तक चारों लेबर कोड के तहत बदले गए हैं.

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संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऑनलाइन गेमिंग का प्रमोशन और रेगुलेशन बिल 2025 पेश किया था, जो 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 1 अक्टूबर से लागू हो गया. ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर लगाम लगाने के लिए इस बिल को पास कराया गया है. ऑनलाइन गेमिंग में पैसे गंवाकर आर्थिक नुकसान उठाने के बाद सुसाइड करने जैसी बढ़ती समस्याओं पर रोक लगाने के लिए बिल पास कराया गया. इस बिल के तहत कुछ प्रतिबंध लगाकर नियामक निकाय बनाए गए और दंड का प्रावधान भी किया गया.

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संसद के शीतकालीन सत्र में SHANTI बिल 2025 पारित हुआ है, जिससे भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा सुधार आएगा. प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर सेक्टर में एंट्री मिलेगी और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके न्यूक्लियर वेपन बनाए जाएंगे. इस कानून के तहत परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को भी कानूनी दर्जा भी दिया गया है. इसके तहत भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को साल 2047 तक 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य भी बनाया गया है.

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संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G बिल को मंजूरी दी. यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नया रूप है. इसके तहत मजदूरी के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं. केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार को भी इस पर खर्च होने वाला पैसा वहन करना होगा. सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम के रूप में फंड की शेयरिंग सामान्य राज्यों के लिए 60:40, उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 रहेगी.

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साल 2025 में संसद में राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 भी पास हुआ, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी और कानून लागू हो गया. 23 जुलाई 2025 को लोकसभा में पेश हुआ विधेयक अगस्त 2025 में लोकसभा और राज्यसभा से पारित हुआ. 18 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी. इस कानून ने साल 2011 की राष्ट्रीय खेल विकास संहिता की जगह ली है. इस कानून के तहत राष्ट्रीय खेल बोर्ड गठित किया जाएगा. राष्ट्रीय खेल अधिकरण बनाया जाएगा और खेल निकायों की संरचना बदली जाएगी.