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8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी उम्मीदें हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होती है तो मौजूदा मिनिमम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹46,000 तक पहुंच सकती है. जानिए इस वेतन आयोग से जुड़ी अहम बातें.
8वें वेतन आयोग को लेकर बढ़ी उम्मीदें

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देशभर के लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं. ये आयोग कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्तों और पेंशन से जुड़ी सिफारिशें तैयार करता है. माना जा रहा है कि आने वाला वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों की आय में बड़ा बदलाव ला सकता है और महंगाई को ध्यान में रखते हुए वेतन ढांचे में संशोधन किया जा सकता है.
लाखों कर्मचारियों को होगा फायदा

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अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है तो इसका सीधा फायदा लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 से 70 लाख पेंशनभोगियों को मिलेगा. इसके अलावा राज्यों में भी अक्सर केंद्रीय वेतन आयोग के आधार पर वेतन संरचना बदली जाती है, इसलिए इसका असर करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है.
18,000 रुपये है अभी मिनिमम बेसिक सैलरी

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फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये प्रति माह है. ये वेतन 2016 में लागू किया गया था. इसके बाद से महंगाई और जीवन यापन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है, इसलिए कर्मचारी संगठनों की मांग है कि अगले वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन को काफी बढ़ाया जाए.
46,000 रुपये तक पहुंच सकती है सैलरी

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कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.57 या उससे ज्यादा तय किया जाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर लगभग 46,000 रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि ये अभी अनुमान है और अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर

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फिटमेंट फैक्टर वो गुणांक होता है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक सैलरी को बढ़ाकर नई सैलरी तय की जाती है. उदाहरण के तौर पर अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा जाता है तो वर्तमान बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा करके नया वेतन निर्धारित किया जाता है. यही वजह है कि कर्मचारी संगठनों के लिए फिटमेंट फैक्टर बेहद अहम मुद्दा होता है.
7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था इजाफा

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7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 में लागू हुई थीं. उस समय न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दी गई थी. इससे लाखों कर्मचारियों को राहत मिली थी. अब उम्मीद की जा रही है कि 8वां वेतन आयोग इससे भी ज्यादा वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश कर सकता है.
वेतन आयोग का इतिहास

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भारत में पहला वेतन आयोग 1946 में बनाया गया था. उसके बाद समय-समय पर नए वेतन आयोग गठित किए जाते रहे हैं. हर वेतन आयोग का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करना, महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक बदलाव सुझाना होता है.
कर्मचारियों की क्या है मांग

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कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए न्यूनतम बेसिक सैलरी को काफी बढ़ाया जाना चाहिए. उनका सुझाव है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर कर्मचारियों की आय में बड़ा सुधार किया जाए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके.
लागू होने में लग सकता है समय

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वेतन आयोग के गठन के बाद उसकी सिफारिशें तैयार करने में आमतौर पर एक से दो साल का समय लगता है. इसके बाद सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करती है और मंजूरी मिलने के बाद ही नया वेतन ढांचा लागू किया जाता है.
अंतिम फैसला सरकार करेगी

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हालांकि 8वें वेतन आयोग को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अनुमान सामने आ रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से वेतन बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही कर्मचारियों की नई सैलरी का अंतिम फैसला होगा.
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