क्या है LPG की कहानी, कैसे हुई थी खोज? दुनिया में इस दिन मनाया जाता है एलपीजी दिवस

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग को 11 दिन पूरे हो गए हैं, जिसका असर अब दुनिया के अन्य देशों में भी दिखाई देने लगा है. पाकिस्तान में तेल संकट की वजह से कई कड़े कदम उठाए गए हैं, इसी बीच भारत में भी एलपीजी गैस के बढ़े दामों और किल्लतों की वजह से हंगामा मचा हुआ है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रसोई तक एलपीजी कैसे पहुंची?

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ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग को 11 दिन पूरे हो गए हैं, जिसका असर अब दुनिया के अन्य देशों में भी दिखाई देने लगा है. पाकिस्तान में तेल संकट की वजह से कई कड़े कदम उठाए गए हैं, इसी बीच भारत में भी एलपीजी गैस के बढ़े दामों और किल्लतों की वजह से हंगामा मचा हुआ है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रसोई तक एलपीजी कैसे पहुंची?

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कब मनाया जाता है एलपीजी दिवस?

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व एलपीजी दिवस हर साल 12 फरवरी को मनाया जाता है, जो इस ईंधन की सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का उत्सव है. अमेरिकी वैज्ञानिक वॉल्टर ओ. स्नेलिंग की खोज से शुरू होकर भारत में उज्ज्वला योजना तक का यह सफर करोड़ों परिवारों की जिंदगी बदल चुका है.

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एलपीजी की प्रारंभिक खोज

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सन् 1910 में अमेरिकी रसायनशास्त्री वॉल्टर स्नेलिंग ने प्राकृतिक गैस से तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) को अलग करने की विधि विकसित की. इस खोज ने गैस को आसानी से संग्रहित और परिवहन योग्य बना दिया. जल्द ही यह रसोई ईंधन के रूप में लोकप्रिय हो गई.

रसोई तक कब पहुंची एलपीजी?

रसोई तक कब पहुंची एलपीजी?4 / 9

1920 के दशक तक अमेरिका में एलपीजी को खाना पकाने के लिए अपनाया गया. यह लकड़ी-कोयले से सस्ता और साफ था. 1930 के दशक में हीटिंग के लिए इसका प्रसार हुआ. इससे घरेलू ऊर्जा में क्रांति आ गई.

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औद्योगिक और वाहन उपयोग की शुरुआत

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1940 में एलपीजी को वाहनों का ईंधन बनाया गया. 1950 तक यह वैश्विक स्तर पर खाना पकाने, हीटिंग और परिवहन में स्थापित हो चुकी. इसकी साफ जलन ने पर्यावरणीय लाभ प्रदान किया. विश्व स्तर पर इसका निर्यात बढ़ा.

भारत में कब आई एलपीजी?

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1960 के दशक में भारत में एलपीजी का घरेलू उपयोग शुरू हुआ. शहरी परिवारों ने इसे अपनाया. सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए वितरण नेटवर्क विकसित किया. ग्रामीण पहुंच अभी चुनौती थी.

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गांव-गांव तक पहुंची एलपीजी

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1965 में NRDP के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी पहुंचाई गई. 1970 में NRPP ने सब्सिडी योजना शुरू की. 1980 में NRSMP ने स्वच्छता से जोड़कर उपयोग को प्रोत्साहित किया. इससे धुआं-मुक्त रसोई का सपना साकार हुआ.

आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी एलपीजी

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1990-2000 के दशक में सब्सिडी बढ़ाई गई. गरीब परिवारों को राहत मिली. सिलेंडर वितरण नेटवर्क देशव्यापी फैला. एलपीजी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी.

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क्यों मनाया जाता है विश्व एलपीजी दिवस?

क्यों मनाया जाता है विश्व एलपीजी दिवस?9 / 9

12 फरवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस एलपीजी की सुरक्षित ऊर्जा को रेखांकित करता है. यह साफ-सुथरी रसोई और सतत विकास का प्रतीक है. भारत जैसे देशों में इसकी भूमिका अब भी बढ़ रही है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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