दुनिया की पहली 'बार्बी डॉल' कब बनी? आज भी बच्चों के बीच है मशहूर

आप सभी ने अपने बचपन में बार्बी डॉल जरूर देखी होगी. हर लड़की के पास बचपन में ये बार्बी डॉल होती थी. जिसके साथ वह पूरी दिन खेला करते थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहली बार इस बार्बी डॉल को किसने और कहां पर देखा था. आपको बता दें कि 9 मार्च, 1959 को न्यूयॉर्क शहर में अमेरिकी खिलौना मेले में पहली बार बार्बी डॉल प्रदर्शित की गई थी. इससे पहले कभी भी किसी ने भी डॉल के रूप में इस तरह की डॉल को नहीं देखा था. दरअसल, ये डॉल प्यारी सी छोटी बच्ची नहीं बल्कि एक खूबसूरत महिला की प्रतिकृति थी.

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कब लॉन्च हुई थी दुनिया की पहली बार्बी डॉल

कब लॉन्च हुई थी दुनिया की पहली बार्बी डॉल2 / 8

आप सभी ने अपने बचपन में बार्बी डॉल जरूर देखी होगी. हर लड़की के पास बचपन में ये बार्बी डॉल होती थी. जिसके साथ वह पूरी दिन खेला करते थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहली बार इस बार्बी डॉल को किसने और कहां पर देखा था. आपको बता दें कि 9 मार्च, 1959 को न्यूयॉर्क शहर में अमेरिकी खिलौना मेले में पहली बार बार्बी डॉल प्रदर्शित की गई थी. इससे पहले कभी भी किसी ने भी डॉल के रूप में इस तरह की डॉल को नहीं देखा था. दरअसल, ये डॉल प्यारी सी छोटी बच्ची नहीं बल्कि एक खूबसूरत महिला की प्रतिकृति थी.

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कितनी होती है बार्बी डॉल की लंबाई?

कितनी होती है बार्बी डॉल की लंबाई?3 / 8

आमतौर पर बार्बी डॉल ग्यारह इंच लंबी होती है और इसके सुंदर बाल होती हैं. ये डॉल अमेरिका में किसी प्रौढ़ मॉडल के चेहरे वाली पहली खिलौना गुड़िया थी. अमेरिका में लगी इस खिलौना प्रदर्शनी से पहले बार्बी डॉल जैसी गुड़िया कभी देखने को नहीं मिली थी.

बार्बी डॉल को किसने बनाया था?

बार्बी डॉल को किसने बनाया था?4 / 8

बता दें कि इस बार्बी डॉल को दुनिया के सामने रूथ हैंडलर नाम की महिला थी. रूथ हैंडलर ने 1945 में अपने पति के साथ मिलकर मैटल इंक की सह-स्थापना की थी और आगे चलकर इसी कंपनी ने बड़े पैमाने पर बार्बी डॉल की मैन्युफैक्चरिंग की. इस बार्बी डॉल को बनाने का आइडिया रूथ को अपनी बेटी से आया. एक बार जब रूथ ने अपनी बेटी को एक गुड़िया की जगह किसी बड़ी महिला की कागज की बनी प्रतिकृति से खेलते हुए देखा. इसी समय रूथ को हैंडलर को ये एहसास हुआ कि बाजार में एक प्यारी बच्ची के चेहरे वाली डॉल की जगह एक ऐसे खिलौने की जरूरत है जो छोटी बच्चियों को भविष्य की कल्पना करने और आगे बढ़ने की शक्ति दे.

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छोटी बच्चियां होती थीं बार्बी डॉल से प्रभावित

छोटी बच्चियां होती थीं बार्बी डॉल से प्रभावित5 / 8

इसके बाद ही रूथ ने किसी क्यूट बच्ची की शक्ल की जगह एक खूबसूरत युवती या फिर किसी महिला की तरह दिखने वाली बार्बी डॉल बनाने की शुरुआत की, जिसमें छोटी बच्चियां अपना भविष्य भी देख सकें. बता दें कि बार्बी डॉल का रंग-रूप लिली नामक एक गुड़िया पर आधारित था, जो एक जर्मन कॉमिक स्ट्रिप के किरदार पर बनी थी.

मैटल कपंनी ने खरीद लिए थे लिली के अधिकार

मैटल कपंनी ने खरीद लिए थे लिली के अधिकार6 / 8

देखते ही देखते लिली नाम की ये गुड़िया बच्चों के बीच बेहद चर्चित हो गई. मैटल ने लिली के अधिकार खरीद लिए और अपना खुद का संस्करण बनाया, जिसका नाम हैंडलर ने अपनी बेटी बारबरा के नाम पर रखा.

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1961 तक बढ़ गई थी बार्बी डॉल की मांग

1961 तक बढ़ गई थी बार्बी डॉल की मांग 7 / 8

1955 में मिकी माउस क्लब टीवी कार्यक्रम के स्पांसर के साथ, मैटल बच्चों के लिए विज्ञापन प्रसारित करने वाली पहली खिलौना कंपनियों में से एक बन गई. उन्होंने इस माध्यम का इस्तेमाल अपने नए खिलौने को बढ़ावा देने के लिए किया 1961 तक बार्बी डॉल की मांग बेहद बढ़ गई. जिसके कारण मैटल ने बार्बी के लिए एक बॉयफ्रेंड भी लॉन्च किया.

मार्केट में लॉन्च हुआ बार्बी डॉल का बॉयफ्रेंड

मार्केट में लॉन्च हुआ बार्बी डॉल का बॉयफ्रेंड8 / 8

हैंडलर ने उसका नाम अपने बेटे ने नाम पर केन रखा. इसके बाद बार्बी की एक दोस्त को भी लॉन्च किया गया. जिसका नाम मिज था, जिसे 1963 में लॉन्च किया गया था. फिर उसकी छोटी बहन, स्किपर अगले साल लॉन्च हुई. हम सभी ने देखा कि पिछले कुछ सालों में बार्बी की बिक्री में भारी उछाल आया और इसके साथ कई विवाद भी सामने आए.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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